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Hindi News उत्तर प्रदेश लखनऊएथनॉल उत्पादन में यूपी और डेनमार्क में हो सकती है साझेदारी एथनॉल उत्पादन में यूपी और डेनमार्क में हो सकती है साझेदारी एथनॉल

एथनॉल उत्पादन में यूपी और डेनमार्क में हो सकती है साझेदारी एथनॉल उत्पादन में यूपी और डेनमार्क में हो सकती है साझेदारी एथनॉल

-डेनमार्क के साथ नई तकनीक पर चर्चा कर रही योगी सरकार -डेनमार्क

एथनॉल उत्पादन में यूपी और डेनमार्क में हो सकती है साझेदारी
एथनॉल उत्पादन में यूपी और डेनमार्क में हो सकती है साझेदारी
एथनॉल
हिन्दुस्तान टीम,लखनऊThu, 02 Feb 2023 07:10 PM
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-डेनमार्क के साथ नई तकनीक पर चर्चा कर रही योगी सरकार

-डेनमार्क ने कृषि अपशिष्ट से एथनॉल और मेथनॉल बनाने की तकनीक की है ईजाद

लखनऊ। विशेष संवाददाता

योगी सरकार कृषि अपशिष्ट से एथनॉल और मेथनॉल बनाने की तकनीक को आत्मसात करने पर विचार कर रही है। दरअसल, हाल ही में डेनमार्क के राजदूत एच ई फ्रेडी स्वान ने मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र से मुलाकात कर पराली को बायो स्ट्रॉ ब्रिकेट में एथनॉल या मेथनॉल में परिवर्तित करने से संबंधित टेक्नोलॉजी की उपयोगिता के विषय पर चर्चा की।

डेनमार्क के राजदूत का कहना है कि गेहूं और धान के कृषि अपशिष्‍ट व पराली से बायोमेथनॉल, ई-मेथनॉल का उत्‍पादन किया जा रहा है। प्रदेश सरकार की ओर से भी इस तरह की तकनीक में रुचि दिखाई गई है और संभावना है कि डेनमार्क में पहला प्लांट स्थापित होने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार तकनीक ट्रांसफर या डेनमार्क के साथ साझेदारी में इस ओर कदम बढ़ा सकती है।

2025 में प्रस्तावित है उत्पादन

इस तकनीक की मदद से पराली के माध्यम से ब्रिकेट तैयार होता है, ब्रिकेट से किण्‍वन द्वारा बायोगैस उत्‍पादन और फिर बायोगैस को इलेक्ट्रिक स्‍टीम मीथेन रिफार्ममेशन प्रक्रिया से बायोमेथनॉल उत्‍पादन होता है। किण्‍वन प्रकिया से उत्‍पादित कॉर्बन डाइआक्‍साइड में हाइडोजन गैस की प्रकिया से ई-मेथनॉल का उत्‍पादन किया जाता है। डेनमार्क द्वारा इस पेटेन्‍ट की गई तकनीक पर आधारित प्रथम परियोजना को स्‍थापित किया जा रहा है। वर्ष 2025 में इससे उत्‍पादन शुरू किया जाना प्रस्‍तावित है।

विश्व में कहीं नहीं है ऐसी तकनीक

प्रस्‍तावित डेनमार्क द्वारा पेटेंटेड तकनीक विश्‍व में कहीं भी क्रियाशील नहीं है। इस पद्धति पर आधारित पहला प्लांट बन रहा है और इसमें 2025 तक उत्‍पादन शुरू होने की संभावना है।

गोरखपुर में भी किया जा रहा है प्रयास

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन द्वारा गोरखपुर में 50 एकड़ भूमि पर टूजी इथेनॉल संयंत्र की स्थापना हो रही है। इस पर लगभग रु 800 करोड़ रुपये का निवेश किया जाना प्रस्‍तावित है। इस संयंत्र में कच्चे माल के रूप में सेल्यूलोज का उपयोग किया जाएगा, जिसमें गन्ना , कृषि अवशेष, वनस्पति तेल और चीनी शामिल हैं। प्रदेश के बड़े शहरों में नगरीय निकाय द्वारा गीले कूड़े से बायो सीएनजी बनाने के प्रस्ताव भी वर्तमान में विचाराधीन है।

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