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एससीईआरटी का ‘दिशांतरण’ बदलेगा सामाजिक विज्ञान का चेहरा, 'अब छात्र केवल पढ़ेंगे नहीं, सोचेंगे भी'

एससीईआरटी का ‘दिशांतरण’ बदलेगा सामाजिक विज्ञान का चेहरा, 'अब छात्र केवल पढ़ेंगे नहीं, सोचेंगे भी'

संक्षेप:

Lucknow News - लखनऊ, प्रमुख संवाददाता। यूपी में सामाजिक विज्ञान की कक्षा अब केवल तिथियों, घटनाओं और परिभाषाओं

Dec 11, 2025 08:49 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, लखनऊ
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लखनऊ, प्रमुख संवाददाता यूपी में सामाजिक विज्ञान की कक्षा अब केवल तिथियों, घटनाओं और परिभाषाओं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह विचार, विमर्श, अनुभव और नागरिक चेतना की प्रयोगशाला बनेगी। राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए सामाजिक विज्ञान का विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल ‘दिशांतरण’ तैयार किया है, जो शिक्षण को रटंत से निकाल कर जीवन से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इस मॉड्यूल का मूल उद्देश्य सामाजिक विज्ञान को केवल एक विषय न मानकर समाज को समझने, स्वीकारने और सुधारने की सोच विकसित करने का माध्यम बनाना है।

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परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत सामाजिक विज्ञान के शिक्षक न केवल पाठ्यक्रम पढ़ाते हैं, बल्कि वही भावी नागरिकों के मन में लोकतांत्रिक मूल्यों, सह-अस्तित्व, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व की नींव भी रखते हैं। ‘दिशांतरण’ इसी भूमिका को मजबूत करने के लिए तैयार किया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और नवीन राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा-2023 के अनुरूप तैयार यह मॉड्यूल शिक्षकों को विषय-वस्तु की सरल व्याख्या के साथ-साथ शिक्षण-अधिगम की आधुनिक और प्रभावी विधियों से भी लैस करेगा। मॉड्यूल में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि छात्र केवल जानकारी प्राप्त न करें, बल्कि प्रश्न करें, तर्क करें, तुलना करें और समाधान खोजने की प्रक्रिया से जुड़ें। इतिहास, भूगोल और नागरिक शास्त्र जैसे विषयों को की-वर्ड और परिभाषाओं तक सीमित रखने के बजाय उन्हें दैनिक जीवन, सामाजिक व्यवहार, पर्यावरण, नागरिक दायित्व और लोकतांत्रिक सहभागिता से जोड़ने की दिशा में यह मॉड्यूल एक स्पष्ट रूपरेखा देने वाला है। कोट- यह मॉड्यूल शिक्षकों को विषय-वस्तु के साथ-साथ गतिविधि-आधारित शिक्षण, स्थानीय संदर्भों के प्रयोग और डिजिटल संसाधनों के प्रभावी उपयोग की स्पष्ट दिशा देता है। इससे सामाजिक विज्ञान की कक्षा अधिक जीवंत, उपयोगी और व्यवहारिक बनेगी। डॉ. पवन सचान, संयुक्त निदेशक, एससीईआरटी