20 जिलों के व्यस्ततम 172 मार्गों पर जाम से मुक्ति दिलाएंगे रूट मार्शल
Lucknow News - - डीजीपी राजीव कृष्ण ने की पायलेट प्रोजेक्ट की शुरुआत - दुर्घटनाओं पर नियंत्रण

- यातायात व्यवस्था में सुधार के लिए होगी नियमित समीक्षालखनऊ, विशेष संवाददाताप्रदेश में दुर्घटना बहुल क्षेत्रों में सुधार की मुहिम के बाद पुलिस ने अब लोगों को जाम से राहत दिलाने की पहल की है। डीजीपी राजीव कृष्ण ने प्रमुख शहरों में यातायात की बाधाओं को दूर करने के लिए 20 जिलों में पायलेट प्रोजेक्ट के तहत सी-आरटीसी (सिटी रिड्यूसिंग ट्रैफिक कंजेशन) योजना की शुरुआत की है। इसके तहत कुल 172 चिन्हित मार्गों पर रूट मार्शल की तैनाती की जाएगी। एक माह में योजना के परिणामों की समीक्षा होगी।डीजीपी ने मंगलवार को पुलिस मुख्यालय में पत्रकारों से कहा कि नगरीय क्षेत्रों में हो रहे विकास और विस्तार के कारण वाहनों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है।
सड़कों पर यातायात का दबाव बढ़ता जा रहा है। यातायात जाम की गंभीर चुनौती से निपटने के लिए योजना के प्रथम चरण में सभी सात पुलिस कमिश्नरेट के अलावा हर परिक्षेत्र के एक प्रमुख जिले (कुल 13 जिले) को भी शामिल किया गया है। डीजीपी मुख्यालय स्तर 171 रूट मार्शल व उनके सहयोग के लिए अन्य यातायात पुलिस कर्मियों की तैनाती की होगी। सर्वाधिक 14 मार्ग कानपुर में चिन्हित किए गए हैं। इसके अलावा अयोध्या के 10 प्रमुख मार्ग भी शामिल किए गए हैं।------ इस फार्मूले से निजात दिलाएगी पुलिस20 शहरों के प्रमुख मार्गों पर यातायात का दबाव अलग-अलग समय पर कम या ज्यादा होता है। चिन्हित मार्गों पर एआई और वैज्ञानिक अध्ययन से अलग-अलग समय में यात्रा में लगने वाले समय में काफी अंतर पाया गया। सी-आरटीसी कार्यक्रम का लक्ष्य पीक आवर्स में शुरुआत के बिंदु और अंतिम बिंदु के बीच यात्रा के समय को कम करना है। यात्रा के प्रवाह को निर्बाध और सुचारू रखने के लिए मार्गां को अवरोध मुक्त रखना है। हर मार्ग के प्रभारी को रूट मार्शल कहा जाएगा, जिसकी नियुक्ति राजपत्रित नोडल अधिकारी, यातायात के प्रस्ताव पर जिला पुलिस प्रमुख द्वारा की जाएगी। रूट मार्शल को एक से अधिक मार्ग का प्रभारी भी बनाया जा सकता है।-----दुर्घटना में मृत्यु दर 11.55 प्रतिशत कम हुईडीजीपी ने इससे पूर्व प्रदेश के 487 सर्वाधिक दुघर्टना बहुल थानाक्षेत्रों को चिन्हित कराकर जीरो फेटेरलिटी डिस्टिक (जेएफडी) योजना लागू कराई थी। 487 थानों में 573 विशेष टीमों का गठन कर उन्हें अत्याधुनिक इलेक्ट्रानिक उपकरणों से लैस किया गया है। डीजीपी के अनुसार तीन माह में वर्ष 2025 की तुलना में इस वर्ष दुर्घटनाओं की संख्या में 7.43%, मृतकों की संख्या में 11.55% और घायलों की संख्या में 8.05% प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। प्रदेश में 68 जिलों तथा सात कमिश्नरेट के 20 जोन को मिलाकर कुल 88 इकाई हैं। इन 88 इकाइयों के क्रिटिकल थानों में से 51 इकाइयों में दुर्घटनाओं में कमी आयी है तथा पांच इकाइयों में दुर्घटनाओं में कोई वृद्धि नहीं हुई है। इस प्रकार से कुल 88 इकाइयों में से 56 इकाई अर्थात 63.6% इकाईयां ग्रीन जोन में हैं। मृतकों की संख्या में 60 इकाइयोंं में कमी तथा छह इकाइयों में कोई वृद्धि नहीं हुई है। कुल 88 इकाइयों में 66 अर्थात 75% ग्रीन जोन में हैं।----प्रथम त्रैमास में 506 दुर्घटनाएं हुईं कमप्रथम त्रैमास में अब तक करीब 450 दुर्घटना जनित मृत्यु में कमी दर्ज की गई है। हर दिन लगभग पांच लोगों को काल के मुंह में जाने से बचाया गया है। दुर्घटनाओं की संख्या में 506 की कमी हुई है।------पायलेट प्रोजेक्ट में कहां कितने मार्गकानपुर - 14 मार्गलखनऊ - 12 मार्गआगरा - आठ मार्गआजमगढ़- नौ मार्गअलीगढ़- छह मार्गअयोध्या - 10 मार्गबांदा - छह मार्गबरेली- छह मार्गगौतमबुद्धनगर - 12 मार्गगाजियाबाद- आठ मार्गगोरखपुर - 10 मार्गगोंडा- चार मार्गझांसी - छह मार्गमथुरा- 10 मार्गमेरठ- 10 मार्गमीरजापुर - आठ मार्गमुरादाबाद - आठ मार्गप्रयागराज- 10 मार्गसहारनपुर- पांच मार्गवाराणसी- 10 मार्ग------
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