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23 सितम्बर, 2020|6:11|IST

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पितरों को स्मरण करने के दिन आज से शुरू

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-पितृपक्ष की तिथि का ज्ञान न होने पर अमावस्या पर किया जाएगा श्राद्धलखनऊ। वरिष्ठ संवाददाताभाद्रपद पूर्णिमा से अश्विन अमावस्या तक श्राद्धपक्ष या पितृपक्ष होता है। इस अवधि में पितरों को तर्पण, पिण्डदान और श्राद्ध किया जाता है। जानकीपुरम निवासी आचार्य सत्यशरण दीक्षित के मुताबिक इस वर्ष श्राद्धपक्ष दो से 17 सितम्बर तक है। श्राद्धपक्ष की उस तिथि को जिसमें पितरों का स्वर्गवास हुआ हो उस दिन जल, तिल, कुश और पुष्पों से श्राद्ध किया जाता है और गाय, कुत्ता, कौवा को ग्रास देकर ब्रहाम्णों को भोजन कराने से पितृऋण उतरता है। एसएस नागपाल बताते हैं कि श्रीमद् भगवद् गीता, हरिवंशपुराण, पितृगायत्री मंत्र और गया या त्र्यंबकेश्वर में पिण्डदान करने से पितृ शान्त होते हैं। आश्विन कृष्ण प्रतिपदा को नाना-नानी का श्राद्ध, पंचमी को जिनकी मृत्यु अविवाहित स्थिति में हुई हो। नवमी को माता एवं सौभाग्यवती यानि पति के रहते ही जिनकी मृत्यु हो गई हो उन स्त्रियों का श्राद्ध किया जाता है। एकादशी और द्वादशी को जिन्होनें संन्यास लिया हो उनका श्राद्ध किया जाता है। चतुदशी को जिनकी अकाल मृत्यु हुई हो उनका श्राद्ध किया जाता है जबकि बच्चों को श्राद्ध कृष्णपक्ष की त्रयोदशी को किया जाता है। किसी कारण से पितृपक्ष की तिथि का ज्ञान न हो तो उनका श्राद्ध अमावस्या को करना चाहिए।

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  • Web Title:The day to remember fathers starts today