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बारिश में बलरामपुर अस्पताल का रैन बसेरा तोड़ा गया

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लखनऊ। निज संवाददाता

बलरामपुर अस्पताल में पुराना अस्थायी रैन बसेरा तोड़ दिया गया है। बारिश के दिनों में अस्थायी रैन बसेरे को तोड़ दिए जाने से तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। तीमारदारों का आरोप है कि बारिश में अस्पताल में ठहरने का कोई प्रबंध नहीं है। वार्ड में मरीज के साथ रुकने नहीं दिया जाता है।

सांझा चूल्हा में खाना भी बनाते थे तीमारदार

बलरामपुर अस्पताल प्रदेश का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है। यहां पर रोजाना हजारों की संख्या में मरीजों का इलाज होता है। अस्पताल अपना 150वां स्थापना दिवस मना चुका है। अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों के लिए निदेशक कार्यालय के आगे न्यू बिल्डिंग के पास रैन बसेरा बना था। इसमें ही अस्पताल की ओर से सांझा चूल्हा भी बना था। जिसमें मरीज न्यूनतम शुल्क देकर तीमारदार खुद ही खाना भी बना लेते थे। एलपीजी गैस की आपूर्ति एक कंपनी करती थी। इससे मरीजों को घरेलू भोजन मिल जाता था।

बारिश में तोड़े जाने से नाराजगी

अस्पताल में बने अस्थायी रैन बसेरे को बारिश में तोड़ दिए जाने से लोगों में नाराजगी है। यहां आने वाले तीमारदारों का कहना है कि बारिश के बाद रैन बसेरा तोड़कर बनाया जाता तो काफी सहूलियत रहती। अब तीमारदारों को रुकने के लिए भटकना पड़ रहा है। बलरामपुर में दूसरे जनपदों से भी मरीज अधिक संख्या में आते हैं। उन मरीज के साथ दो से तीन तीमारदार भी आते हैं। क्योंकि अस्पताल में भागदौड़ के लिए दो-तीन दिन लोगों की जरुरत होती है।

फैक्ट फाइल

अस्पताल में बेड- 756

ओपीडी में आने वाले मरीज- 7000-8000

इमरजेंसी में बेड- 50

वर्जन

अस्थायी रैन बसेरा काफी खराब हो गया था। कई जगह से पानी भी टपकता था। तीमारदारों के लिए जल्द ही नया रैन बसेरा बनवाया जाएगा।

डॉ. राजीव लोचन, निदेशक, बलरामपुर अस्पताल

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  • Web Title:Temporary night shelter broken in Balrampur hospital