रेडिएशन जांचने के लिए छह हजार मोबाइल टॉवर चेक हुए, सभी सुरक्षित
Lucknow News - मोबाइल टावरों से निकलने वाले इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड रेडिएशन को लेकर लोगों में संशय है। दूरसंचार विभाग ने स्पष्ट किया है कि 5जी, 4जी सहित सभी मोबाइल टावर पूरी तरह सुरक्षित हैं। भारतीय सुरक्षा मानकों के अनुसार, ये तरंगें मानव शरीर को कोई क्षति नहीं पहुंचातीं। नागरिकों की शंकाओं के निवारण के लिए एक पोर्टल भी स्थापित किया गया है।

मोबाइल टावरों से निकलने वाले इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड रेडिएशन को लेकर लोगों में संशय है। आम जनमानस में व्याप्त भ्रांतियों को दूर करते हुए दूरसंचार विभाग, उत्तर प्रदेश (पूर्व) एलएसए ने स्पष्ट किया है कि 5जी, 4जी समेत सभी तकनीकों के मोबाइल टावर पूरी तरह सुरक्षित हैं। दूरसंचार विभाग ने साफ किया है कि मोबाइल टावरों से उत्सर्जित तरंगें अंतरराष्ट्रीय मानकों से भी अधिक कठोर भारतीय सुरक्षा मानकों के अंतर्गत हैं। ये नॉन-आयनाइजिंग रेडियो फ्रीक्वेंसी होती हैं, जो मानव शरीर या डीएनए को कोई क्षति नहीं पहुंचातीं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इसे सुरक्षित माना है। अपर महानिदेशक दूरसंचार अरुण कुमार वर्मा ने सोमवार को मीडिया के समक्ष हाल में किए गए निरीक्षणों के आधार पर यह जानकारी दी।
वर्ष 2025-26 के दौरान उत्तर प्रदेश (पूर्व) में कुल 1,21,866 बेस ट्रांससीवर स्टेशनों में से 6,240 का औचक निरीक्षण और रेडिएशन परीक्षण किया गया, जिसमें सभी मानक सुरक्षित पाए गए। अपर महानिदेशक दूरसंचार ने कहा कि विभाग जन-स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है और मानकों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर भारी जुर्माने के साथ टावर बंद करने का सख्त प्रावधान है। नागरिकों की शंकाओं के निवारण के लिए दूरसंचार विभाग तरंग संचार पोर्टल (tarangsanchar.gov.in) संचालित कर रहा है। यहां कोई भी व्यक्ति अपने घर के पास स्थित टावर की स्थिति देख सकता है और वैज्ञानिक तथ्य जान सकता है। यदि किसी को फिर भी संशय है, तो वह इसी पोर्टल के माध्यम से नाममात्र ₹4000 के शुल्क पर अपने पास स्थित टावर की ईएमएफ जांच का आधिकारिक अनुरोध कर सकता है।
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


