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शिक्षा में सुधार और देश को विश्व गुरु बनाने में सक्षम है शिक्षक : मुकुल कानिटकर

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भारतीय शिक्षण मण्डल के राष्ट्रीय संगठन मंत्री मुकुल कानिटकर ने कहा है कि शिक्षा में सुधार, शिक्षण पद्धति व पाठ्यक्रम निर्धारण शासन से विमुक्त होना चाहिए। सरकार केवल शिक्षा नीति व पाठ्यक्रम में बदलाव ला सकती है, छात्रों को ज्ञान देकर  सुयोग्य नागरिक बनाने का दायित्व शिक्षकों का है। शिक्षा की आदर्श भारतीय शिक्षा पद्धति से भारत को विश्व गुरु बनाने में शिक्षक समर्थ है।
श्री मुकुल रविवार को जिला पंचायत सभागार में भारतीय शिक्षण मण्डल अवध प्रांत के कार्यकर्ता सम्मेलन मे बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि आज की शिक्षा पद्धति से कोई सन्तुष्ट नहीं है। आधुनिक शिक्षा पाश्चात्य संस्कृति पर आधारित होकर अर्थ व परीक्षा प्रधान हो गई है। जिसका भारतीय संस्कृति, रचनात्मक व मौलिक पहल, ज्ञान से कोई सम्बन्ध नहीं है। शिक्षा का उद्देश्य केवल अर्थ कमाने का जरिया नही समाज व राष्ट्र सेवा है। उन्होंने कहा कि 1823 में भारत की साक्षरता शत प्रतिशत थी, 1835 में लार्ड मैकाले की शिक्षा पद्धति ने शिक्षा व्यवस्था को चौपट कर देश की आजादी तक 18 प्रतिशत पर पहुंचा दिया। 
अवध विश्वविद्यालय के कुलपति मनोज दीक्षित ने कहा कि शिक्षण मण्डल शिक्षा में गुणात्मक सुधार व युवाओं में चारित्रक सुधार के लिए सार्थक प्रयास कर रहा है। मण्डल के संयुक्त मंत्री डा.ओपी सिंह ने मण्डल की ओर से शिक्षा में सुधार के लिए किए जा रहे प्रयास की विस्तार से जानकारी दी। प्रांत उपाध्यक्ष महेन्द्र सिंह ने सम्मेलन में आए अतिथियों व बुद्धिजीवियों के प्रति आभार व्यक्त किया। जिलाध्यक्ष अजय प्रकाश सिंह व मंत्री नवनीत कुंअर श्रीवास्तव ने अतिथियों को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस मौके पर बिन्देश्वरी प्रसाद सिंह,नृपेन्द्र मिश्र, रमेश सिंह, रंजन शर्मा,श्याम बहादुर सिंह व दिलीप सिंह मौजूद रहे।

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  • Web Title:Teacher is able to improve education and make the country a world guru: Mukul Kanitkar