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नतीजों में गड़बड़ियों से बैक पेपर देने को मजबूर छात्र

- परीक्षाओं के समय पॉलीटेक्निक के चक्कर लगा रहे रोजाना दर्जनों बच्चे

परीक्षाओं के नतीजों में हुई गड़बड़ियों ने छात्रों की कमर तोड़ कर रख दी है। गड़बड़ियों के चलते प्रदेश भर से दर्जनों की संख्या में छात्र प्राविधिक शिक्षा परिषद आने को मजबूर बने हुए हैं। महीनों से आने के बाद भी परिषद द्वारा केवल आश्वासन दिया जा रहा है, वहीं परीक्षाएं सिर पर होने से परेशानियां बढ़ रही हैं। दरअसल, छात्र यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि उन्हें बैक पेपर की तैयारियां करनी है अथवा नहीं। इसके विपरीत बैक पेपर के लिए भी छात्रों से संस्थानों द्वारा अतिरिक्त वसूली की जा रही है।

छात्रों की मानें तो पॉलीटेक्निक संस्थानों के प्रिंसिपल को कई बार नतीजों में आई गड़बड़ियों को सुधारने के लिए आवेदन किया, लेकिन उनकी समस्या का कोई हल नहीं निकला, जिसके चलते उन्हें खुद ही परिषद आने पर मजबूर होना पड़ रहा है। सूत्रों की मानें तो बैक पेपर की गड़बड़ियों के चलते छात्रों को बैक पेपर फार्म खरीदना पड़ रहा है, जिससे परिषद का खजाना तो भर रहा है, जबकि छात्रों की मुश्किलें उठानी पड़ रही हैं। बार-बार बैक पेपर परीक्षाओं में बैठने के बाद भी नतीजों में नंबर नहीं चढ़ाए जा रहे हैं। छात्रों की समस्या यह है कि वे परीक्षा की तैयारी में जुटे या परिषद के चक्कर लगाएं।

छात्रों से बातचीत

1- सुलतानपुर रोड, गोसाईंगंज स्थित सरोज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी से सिविल इंजीनियरिंग के छात्र इंद्रजीत यादव बताते हैं कि दो बार बैक पेपर देने के बाद भी वहीं नंबर प्रिंट हो गए। परीक्षा केअंकों की जानकारी नहीं मिलने से बैक पेपर फार्म भरना पड़ रहा है। अगस्त में रिजल्ट आने के बाद से ही कोशिश कर रहा हूं, लेकिन कोई सुधार नहीं हो रहा। अगस्त में डाक द्वारा भी परिषद को इसकी जानकारी उपलब्ध करा चुका हूं।

2- सुलतानपुर रोड, गोसाईंगंज स्थित सरोज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग करने वाले रजत कुमार ने बताया कि कई बार संस्था में इस बारे में जानकारी दी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। बैक पेपर हर बार देना पड़ रहा है, जिससे सेमेस्टर की परीक्षाओं पर असर पड़ता है।

3- कानपुर राजकीय पॉलीटेक्निक से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में पढ़ाई करने वाले जयप्रकाश ने बताया कि रिजल्ट में सभी विषयों के नंबर गायब हैं। लंबे समय से परिषद के चक्कर काट रहा हूं। संस्थान से लेकर परिषद तक के सभी लोगों से मिल चुका हूं, लेकिन हल नहीं मिला। कभी अधिकारी नहीं मिलते हैं तो कभी समस्या बताकर भेज दिया जाता है। यदि परिषद ने हल नहीं निकाला तो मजबूरन बैक पेपर भी देने पड़ेंगे।

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  • Web Title:Students forced to return back papers from the disadvantages of the results
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