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विवि के प्रयास के बाद भी वैधानिक समितियों नहीं हुई गठित

डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की ओर से पहल किए जाने के बावजूद अभी तक शासन ने जनरल कौंसिल और कार्यपरिषद जैसी वैधानिक समितियों का गठन नहीं किया गया है। यहीं वजह है कि विश्वविद्यालय में प्रशासनिक, शैक्षिक और वित्तीय कार्य में बाधा पैदा आ रही है। हालात यह है कि विश्वविद्यालय में काम चलाऊ व्यवस्था के तहत ही फैसले लिए जा रहे हैं।

विश्वविद्यालय की प्रशासनिक, शैक्षिक और वित्तीय फैसले लेने के लिए कार्यपरिषद, एकेडमिक कौंसिल और वित्त समिति बनाई है। इसके अलावा विश्वविद्यालय की सर्वोच्च समिति जनरल कौंसिल है, लेकिन कार्यपरिषद, एकेडमिक कौंसिल और वित्त समिति में पिछले डेढ़ वर्ष से सदस्यों के स्थान रिक्त हैं। कोरम के अभाव में इन वैधानिक समितियों की उक्त समय में एक भी बैठक नहीं हो पाई है। जिससे विश्वविद्यालय में प्रशासनिक, शैक्षिक और वित्तीय फैसले बिना समितियों की स्वीकृत के लिए जा रहे हैं। इन फैसले को अगर किसी ने वैधानिक चुनौती दे दी तो विश्वविद्यालय के लिए परेशान पैदा हो जाएगी। विश्वविद्यालय सूत्रों के अनुसार शासन को समितियों में सदस्यों के स्थान रिक्त रहने की स्थिति से अवगत कराया गया है। साथ जल्द से जल्द सदस्यों को मनोनीत करने का अनुरोध किया गया है, पर अभी तक इस दिशा में शासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। विश्वविद्यालय के जानकारों का कहना है कि वैधानिक समितियों में पदेन सदस्य मौजूद हैं। केवल वह सदस्य नहीं हैं, जिन्हें प्रदेश सरकार मनोनीत करती है।

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जनरल कौंसिल तो विवि की स्थापना से ही पूरी तरह नहीं हुई गठित

विश्वविद्यालय की सर्वोच्च संस्था जनरल कौंसिल है। इसके अध्यक्ष मुख्यमंत्री होते हैं, पर इसका हाल तो और भी खराब है। यह वैधानिक समिति तो विश्वविद्यालय की स्थापना के समय से ही आधी-अधूरी है। आज तक इसका पूरा गठन नहीं हुआ है। यही वजह है कि विश्वविद्यालय की स्थापना के 12 वर्ष बाद भी जनरल कौंसिल की एक भी बैठक नहीं हो पाई है।

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  • Web Title:Statutory committees have not been formed even after university efforts