मुतवल्ली वक्फ संपत्तियों के उपयोग और आय का हिसाब देने से मुक्त नहीं
Lucknow News - - एक मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सूचना आयोग ने दिया आदेश - जन

लखनऊ, विशेष संवाददाता। मुतवल्ली वक्फ संपत्तियों के उपयोग, उनका उद्देश्य और उससे होने वाली आय का हिसाब देने से मुक्त नहीं हो सकते। राज्य सूचना आयोग ने वक्फ संपत्तियों से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया। आयोग ने सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को निर्देशित किया कि वह 15 दिनों में बिंदुवार, स्पष्ट व प्रमाणित अभिलेखों सहित पूरी सूचना उपलब्ध करवाए। जनसूचना अधिकारी पर आयोग ने 25 हजार का जुर्माना लगाया है। राज्य सूचना आयुक्त मोहम्मद नदीम की पीठ ने आदेश दिया है कि मुतवल्ली भले ही लोक प्राधिकारी की श्रेणी में न आते हों, लेकिन वक्फ संपत्तियों के उपयोग, आय और उद्देश्य का हिसाब देने से उन्हें मुक्त नहीं किया जा सकता।
अभी तक वक्फ संपत्तियों के मुतवल्ली वक्फ संपति का हिसाब-किताब इस आधार पर देने से बचते रहे हैं कि वे लोक प्राधिकारी की श्रेणी में नहीं आते हैं। पीठ ने आदेश में कहा है कि मुतवल्ली के लोक प्राधिकारी न होने का तथ्य किसी भी स्थिति में यह अर्थ नहीं रखता कि वह वक्फ संपत्ति में मनमाना, अवैधानिक कार्य संचालित करे। आयोग ने सुन्नी वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी को आदेश दिया है कि इस मामले में हुई प्रशासनिक विफलता के लिए व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी रहते हुए 30 दिनों में सुधारात्मक कार्रवाई रिपोर्ट आयोग को प्रस्तुत करें। आदेश की प्रति अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव को अनुपालन के लिए भी भेजी है। यह था मामला फर्रखाबाद की एक वक्फ संपत्ति के बारे में परमिंदर कौर ने सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के सूचना मांगी थी कि क्या उसमें शराब की दुकान खोलने की अनुमति वक्फ बोर्ड से की गई थी या नहीं? शराब की दुकान से मुतवल्ली द्वारा प्रतिमाह कितना किराया प्राप्त होना दर्शाया जा रहा है? वक्फ बोर्ड ने जब यह जानकारी नहीं दी तो परमिंदर कौर ने सूचना आयोग के समक्ष अपील प्रस्तुत की तब सुन्नी वक्फ बोर्ड ने पक्ष प्रस्तुत करते हुए कहा कि वक्फ संपत्ति को किराए पर देने और किराया वसूलने का अधिकार मुतवल्ली में निहित है, वक्फ संपत्ति की आय का मदवार विवरण प्रस्तुत नहीं होता, वो एकमुश्त होता है। चूंकि मुतवल्ली लोक पदाधिकारी नहीं है, अतः सूचना उपलब्ध कराना संभव नहीं है।
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