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मोरे भरत राम दोई आंखी, सत्य कहुंऊ मै शंकर साखी

अदम गोडवी मैदान में सोमवार सांझ की बेला में श्रीराम कथा की अमृतवर्षा हुई। कथाव्यास उज्जैन के स्वामी प्रणवपुरी अंशुमान महराज ने कहा कि कैकेयी को कोपभवन में महाराज दशरथ भांति-भांति से मनाने का प्रयास कर रहे हैं। मोरे भरत राम दोई आंखी, सत्य कहऊं मैं शंकर साखी। 
दशरथ पहले भरत का नाम लेते हैं फिर राम का। जिससे कैकेयी को न लगे राम को बहुत प्रेम करते हैं। कहते हैं लोभ तो राम को छुआ नहीं है वह तो भरत से बहुत प्रेम करते हैं। कैकेयी यह सब किसने तुम्हारे मन जहर घोल दिया है। चक्रवर्ती ने कहा, बस कल तक समय दे दो और भरत को आने दो। भरत को राजगद्दी मिलेगी। 
कैकेयी कहती हैं कि मंथरा ने सब बता दिया है जैसे राम राजा बनेंगे मुझे जेलखाने भेज दिया जाएगा। महाराज समझाते हैं कि राम तो दुश्मन को जेल नहीं भेजते। फिर आप तो उनकी माता हैं। कैकेयी नहीं मानती हैं। कहती हैं सुबह पहले राम वनवास जाएंगे। कथाव्यास अंशुमान कहते हैं, इस समय देवताओं ने अयोध्या में डेरा जमा लिया है। राम को वनवास भेजने की कई वजह है। पहला श्रवण कुमार के माता-पिता का श्राप था कि चार बेटों के बावजूद आपकी लाश लावारिस रहेगी। चक्रवर्ती होने के बाद भी कोई उठाने वाला नहीं होगा। कैकेयी के जिद के आगे राजा दशरथ उसके पैरों में गिर पड़े। सिर पटक रहे हैं। कंठ सूख रहे हैं। लेकिन गजगामिनी जैसे कोई कल्पतरू को निपात कर आई हो, कैकेयी निष्ठुर बनी हुई है। 
मुख्य यजमान यूपीपीसीएल के पूर्व एमडी एपी मिश्रा, बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष जीपी मिश्रा, आरपी मिश्रा ने कथाव्यास का स्वागत किया। पावर कार्पोरेशन के आई डी त्रिपाठी, विजय बहादुर मिश्र, एक्सईएन दिव्यरंजन, शिवमूर्ति मिश्र, पूर्व प्रधानाचार्य एसएन चतुर्वेदी, शारदा कांत पांडेय, सुरेन्द्र मोहन मिश्र व उत्कर्ष मिश्र आदि रहे। 
 

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  • Web Title:sriram katha