DA Image
27 जनवरी, 2020|2:42|IST

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

न्यायिक व्यवस्था पर विश्वास और आस्था को और मजबूत करें: हृदय नारायण

प्रमुख संवाददाता / राज्य मुख्यालयहमारे देश में आमजन का न्यायिक व्यवस्था पर दृढ़ विश्वास है। इसे और मजबूत करते हुए इस विश्वास और आस्था को बनाए रखना होगा। यह बात विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने शुक्रवार को 2015 बैच के प्रशिक्षु न्यायिक अधिकारियों को विधानभवन के राजर्षि पुरूषोत्तम दास टंडन हाल में संबोधित करते हुए कही। श्री दीक्षित ने कहा कि भारत में विधि के शासन की कल्पना हमारे संविधान निर्माताओं ने की थी। इसके पूर्व इंग्लैण्ड में राजारानी के समय भी विधि के शासन का दावा किया जाता रहा है। श्री दीक्षित ने भारत की हजारों साल पुरानी विधि की अवधारणा पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि विधि के शासन की अवधारणा प्राचीन समय से प्रचलित है। वैदिक शासन में वरुण नियमों का पालन कराते हैं। सभी देवताओं सहित राजा इन्द्र भी नियमों के अधीन हैं। विधि व्यक्ति व शासन से बड़ा है। श्री दीक्षित ने संविधान सभा में हुई चर्चा के बारे में कहा कि संविधान सभा में उच्चकोटि के विद्वानों ने वाद-विवाद के बाद विधि के शासन की प्रणाली का इजाद किया है। उन्होंने प्रशिक्षित न्यायविदों को इस संविधान सभा के वाद-विवाद से विस्तार से अध्ययन करने की बात कही।विधानसभा अध्यक्ष ने मुकदमों पर तारीखें और उसमें निर्णय में विलम्ब व मुकदमों की बढ़ती हुई संख्या की ओर न्यायविदों का ध्यान आकृष्ट किया। उनसे यह अपेक्षा की कि उन्हें गरीबों के प्रति अतिसंवेदनशील होना चाहिए। इस अवसर पर विधान सभा के प्रमुख सचिव प्रदीप कुमार दुबे ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में न्यायिक प्रशिक्षण व अनुसंधान संस्थान के निदेशक पी.के. श्रीवास्तव और अपर विधि परामर्शी डॉ. राजेश सिंह सहित अनेक अधिकारीगण उपस्थित रहे।