सुहाग, सौभाग्य व पीपल पूजन का विशेष पर्व सोमवती अमावस्या आज
सोमवती अमावस्या सोमवार को मनायी जाएगी, जिसका विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं और पीपल वृक्ष की पूजा करती हैं। स्नान, दान, और भगवान विष्णु की पूजा से पापों का नाश होता है।

स्नान, दान और भगवान विष्णु व पीपल वृक्ष की पूजा का विशेष पर्व सोमवती अमावस्या सोमवार को मनायी जाएगी। अधिक मास की सोमवती अमवस्या के कारण इस बार इसका विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। वेद विद्यालय हनुमान सेतु के वेदाचार्य गोविंद कुमार शर्मा ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवती अमावस्या पर पवित्र नदियों में स्नान कर सूर्य देव को अर्घ्य देने और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
महिलाएं रखती हैं व्रत, करती हैं पीपल की पूजा व परिक्रमा
सोमवती अमावस्या का दिन विशेष रूप से विवाहित महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। वेदाचार्य गोविंद कुमार शर्मा ने बताया कि महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, परिवार की सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना से व्रत रखती हैं। सुबह स्नान के बाद पीपल वृक्ष को भगवान विष्णु का स्वरूप मान कर उनकी पूजा करती हैं। महिलाएं पीपल के वृक्ष की परिक्रमा और कच्चा सूत या धागा लपेटते हुए 108 या अपनी श्रद्धानुसार परिक्रमा भी करती हैं। व्रती महिलाएं कथा सुनती हैं और परिवार के कल्याण की प्रार्थना करती हैं। सोमवती अमावस्या पर शिवलिंग का जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना गया है।
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