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148 वर्ष बाद शनि जयंती के दिन सूर्य ग्रहण

सूतक काल नहीं होगा मान्य मंदिर के कपाट खुले रहेंगे सूर्य ग्रहण, शनि जयंती और

148 वर्ष बाद शनि जयंती के दिन सूर्य ग्रहण
हिन्दुस्तान टीम,लखनऊTue, 08 Jun 2021 08:20 PM
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सूतक काल नहीं होगा मान्य मंदिर के कपाट खुले रहेंगे

सूर्य ग्रहण, शनि जयंती और वट सावित्री व्रत एक ही दिन पड़ रहा

लखनऊ। संवाददाता

साल का पहला सूर्य ग्रहण 10 जून को ज्येष्ठ माह की अमावस्या के दिन लग रहा है। इस दिन शनि जयंती और वट सावित्री व्रत भी है। सूर्य ग्रहण और शनि जयंती एक दिन होने से इस तिथि का महत्व और अधिक बढ़ गया है। यह संयोग 148 वर्ष बाद पड़ रहा है। इससे पहले 26 मई 1873 को एक ही दिन सूर्य ग्रहण और शनि जयंती पड़ चुकी है। यह ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा। सूर्य ग्रहण दोपहर 1:42 बजे शुरू होगा, ग्रहण का मध्य 3:20 बजे और शाम 6:41 बजे ग्रहण समाप्त होगा।

ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई न देने से सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। सूतक काल न होने से इस दौरान सभी शुभ कार्य किए जा सकेंगे, मंदिर के कपाट भी खुले रहेंगे। सूर्य ग्रहण वृषभ राशि में लग रहा है। वृष राशि में सूर्य, चंद्र, बुध और राहु होंगे। ग्रहण प्रारम्भ के समय कन्या लगन होगा। सूर्य और चंद्र मृगशिरा नक्षत्र में रहेंगे।

अनाज, तिल और गुड़ का दान करें

जिनका सूर्य कमजोर है ग्रहण काल के दौरान भगवान शिव, विष्णु, सूर्य और चंद्र देव के मंत्र का जाप करें। ग्रहण के बाद अनाज, तिल और गुड़ का दान करें।

वट सावित्री पूजा की तिथि को लेकर संशय

वट सावित्री व्रत को लेकर बहुत से लोगों में संशय बना हुआ है। वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। यह व्रत पति की लंबी उम्र की कामना के लिए महिलाएं रखती हैं। अधिकांश पंचांग के अनुसार 10 जून तो कुछ पंचांग 9 जून को व्रत की तिथि बता रहे हैं। अमावस्या तिथि 9 जून को दोपहर 1:57 बजे से शुरू होकर 10 जून शाम 4:22 तक है। ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि हिन्दू धर्म में उदया तिथि के दिन ही व्रत रखा जाता है। वट वृक्ष पूजन 10 जून को सूर्य ग्रहण (दोपहर 1:42 बजे) लगने से पहले करना श्रेष्ठ रहेगा। वट वृक्ष पूजन में तने पर कच्चा सूत लपेटकर 108 परिक्रमा करने का विधान है। लेकिन कम से कम सात बार वट वृक्ष की परिक्रमा जरूर करनी चाहिए।

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