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प्रादेशिक संगीत प्रतियोगिता

वॉयलिन, गिटार, सितार की सुरीली जुगलबंदी

-प्रादेशिक संगीत प्रतियोगिता का आखिरी दिन

-आज होगा विजेताओं का मुकाबला

लखनऊ। वरिष्ठ संवाददाता

चार दिनों तक घुंघरुओं की झनकार और तबले की थाप के बीच सुर-ताल की जमकर परीक्षा हुई। प्रदेश भर से सैकड़ों सुर-साधक लखनऊ में जुटे और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने का प्रयास किया। अब प्रतियोगिता का दौर खत्म, विजेता मिल चुके हैं और अब होगा सर्वश्रेष्ठ कलाकारों का 'उल्लास उत्सव'।

उप्र संगीत नाटक अकादमी में 14 मई से प्रादेशिक शास्त्रीय संगीत प्रतियोगिता हो रही थी। इसके अंतर्गत पहले दिन गायन, दूसरे दिन तबला और पखावज, तीसरे दिन कथक और गुरुवार को यानी आखिरी दिन वायलिन, सितार, बांसुरी, गिटार आदि जैसे तमाम वाद्ययंत्रों का मुकाबला हुआ। पूरे दिन में लगभग 50 बाल, किशोर व युवा कलाकारों ने यहां अपनी कला का प्रदर्शन किया। माहौल कुछ इस तरह का था जैसे हवा में सात सुरों की सरगम घुल रही हो। देर शाम मुकाबले खत्म हुए और परिणाम जारी किया गया। अब शुक्रवार को चारों दिनों के बाल, किशोर व युवा वर्ग के विजेता 'उल्लास उत्सव' के तहत संत गाडगे महारात सभागार में प्रस्तुतियां देंगे। गुरुवार को हुई गज, तंत्र व सुषिर वाद्य की प्रतियोगिता के निर्णायक असगर हसन, केशव रघुनाथ और अभिनव सिन्हा थे।

प्रदेश में मौजूद हैं संगीत के धुरंधर: निर्णायकों का कहना था कि जिस तरह की प्रतिभाएं यहां पूरे प्रदेश से आई थीं, उन्हें देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि उत्तर प्रदेश में अभी शास्त्रीय संगीत का भविष्य सुरक्षित है। हालांकि जो कलाकार यहां आ रहे हैं, उन्हें उनकी प्रतिभा के अनुसार तालीम नहीं मिली है। अगर इस एक कमी को दूर कर लिया जाए और संगीत का शिक्षा के साथ जोड़कर छोटे कस्बों और शहरों में संगीत की अच्छी तालीम उपलब्ध होने लगे तो भविष्य के लिए बहुत बेहतरीन कलाकार तैयार किए जा सकते हैं।

वादन प्रतियोगिता के विजेता-

अमनजीत जैन, अमितोज सिंह, शिवांश मिश्रा, मनीष कुमार राय, दीप सिंह, आलोक कुमार, रौनित चटर्जी, मिहिका गांगुली, यश पाण्डेय, आकांक्षा सिंह, विष्णु साध, विनीत शर्मा, वंशिका शर्मा।

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