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शर्म, झिझक और झोलाछाप बिगाड़ रहे बीमारियां

खान-पान और बेढंगी जीवनशैली से पाइल्स, फिशर समेत दूसरी मलद्वार की बीमारियों में तेजी से इजाफा हो रहा है। चिंता की बात यह है कि लोग शुरू में इलाज...

शर्म, झिझक और झोलाछाप बिगाड़ रहे बीमारियां
हिन्दुस्तान टीम,लखनऊThu, 22 Feb 2024 02:05 AM
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खान-पान और बेढंगी जीवनशैली से पाइल्स, फिशर समेत दूसरी मलद्वार की बीमारियों में तेजी से इजाफा हो रहा है। चिंता की बात यह है कि लोग शुरू में इलाज कराने में हिचकते हैं। बीमारी साझा करने में भी संकोच करते हैं। समस्या गंभीर होने पर झोलाछाप या फिर मेडिकल स्टोर में जाकर दवा लेते हैं। समय पर मुकम्मल इलाज न मिलने से बीमारी गंभीर रूप ले लेती है। यह जानकारी केजीएमयू जनरल सर्जरी विभाग के पूर्व डॉ. अरशद अहमद ने दी।

वह बुधवार को जनरल सर्जरी विभाग के प्रेक्षागृह में सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। विभाग के 112वें स्थापना दिवस समारोह के मौके पर सेमिनार हो रहे हैं। डॉ. अरशद अहमद ने बताया कि 60 प्रतिशत पाइल्स, फिशर, फिशटुला समेत दूसरी बीमारियों के मरीज शुरूआत में झोलाछाप से इलाज कराते हैं। 10 प्रतिशत लोग मेडिकल स्टोर से दवा लेकर खाते हैं। बाकी पांच प्रतिशत बाकी पैथी का इलाज लेते हैं। बाकी 25 प्रतिशत प्रशिक्षित डॉक्टर से इलाज लेते हैं। शहरी क्षेत्र में यह आंकड़ा कुछ बेहतर है। शुरूआत में 30 प्रतिशत लोग ही झोलाछाप के पास इलाज कराते हैं। बाकी 70 प्रतिशत प्रशिक्षित या दूसरी पैथी के डॉक्टरों से इलाज कराते हैं। उन्होंने बताया कि समय पर इलाज से बीमारी पर आसानी से काबू पाया जा सकता है। कार्यक्रम में जनरल सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. अभिनव अरूण सोनकर, डॉ. अवनीश कुमार, डॉ. कुशाग्र, डॉ. संजीव कुमार, डॉ. सुरेश कुमार समेत अन्य डॉक्टर मौजूद रहे।

लेजर सभी के लिए उपयुक्त नहीं

डॉ. अरशद ने कहा कि लोग इंटरनेट पर लेजर के बारे में पढ़कर उसी से इलाज कराने का दबाव बनाते हैं। जबकि यह गलत है। सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर ही इलाज कराना चाहिए। डॉक्टर पर भरोसा करें। उन्होंने बताया कि कसरत करें। पैदल चलें। डाइड में फाइबर व पानी की मात्रा बढ़ाएं।

फास्ट फूड से मलद्वार के कैंसर का खतरा

डॉ. संदीप वर्मा ने कहाकि मलद्वार के कैंसर के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है। इसकी बड़ी वजह रिफाइंड तेल में पका भोजन, फास्ट फूड, मैदा आदि का सेवन है। शुरूआत में मरीज को कब्ज, डायरिया, शौच से खून आना जैसे लक्षण होते हैं। जिन्हें लोग नजरअंदाज करते हैं। ऐसे में बीमारी गंभीर हो जाती है। उन्होंने बताया कि खान-पान पर नियंत्रण रखकर बीमारी से खुद को काफी हद तक बचा सकते हैं।

बेकाबू ब्लड प्रेशर के और भी कारण

केजीएमयू इंडोक्राइन सर्जरी विभाग के डॉ. कुलरंजन सिंह ने कहा कि इलाज के बावजूद ब्लड प्रेशर काबू में नहीं आ रहा है। घबराहट और सिरदर्द जैसी समस्या बनी है। तो एड्रिनल ग्लैंड की जांच कराएं। किडनी पर एड्रिनल ग्लैंड होती है। उन्होंने बताया कि एड्रिनल ग्लैंड पर ट्यूमर होने से भी यह समस्या बनी रहती है। ब्लड प्रेशर के एक प्रतिशत मरीजों में यह समस्या हो सकती है। ऑपरेशन कर ट्यूमर हटाकर मरीज को बीमारी से बचा सकते हैं।

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