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पिछले वित्तीय वर्ष की छात्रवृत्ति व फीस भरपाई की सरकारी मदद से 62 हजार दलित छात्र-छात्राएं वंचित

- मामला राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग तक पहुंचा- केन्द्र से बकाया केन्द्रांश मिलने पर ही हो सकेगा भुगतानविशेष संवाददाता - राज्य मुख्यालयप्रदेश में विभिन्न शैक्षिक पाठयक्रमों के अनुसूचित जाति के 62 हजार छात्र-छात्राओं को 2016-17 छात्रवृत्ति और फीस भरपाई की सरकारी मदद अब तक नहीं मिल पायी है। यह रकम कुल 302 करोड़ रुपये की है। छात्रवृत्ति और फीस भरपाई की सरकारी मदद न मिल पाने की वजह से यह छात्र-छात्राएं अपने कालेज और विश्वविद्यालय से अंकतालिका और अन्य शैक्षिक प्रमाण पत्र हासिल नहीं कर पा रहे हैं। पिछले दिनों लखनऊ आए आयोग के चेयरमैन प्रो. रामशंकर कठेरिया ने कहा था कि समय से छात्रवृत्ति और फीस भरपाई की सरकारी मदद न मिलने से इन दलित छात्र-छात्राओं को डिग्री व अंकतालिक आदि दस्तावेज देने से इनकार कर रहे हैं। इन बच्चों ने अपनी फीस नहीं जमा की है। उधर, समाज कल्याण अधिकारी सफाई देते हैं कि केंद्र से 1273 करोड़ रुपये का केन्द्रांश न मिलने से दिक्कत है। केन्द्रीय वित्त और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय से लिखा पढ़ी गई है। उम्मीद है इस खत्म हो रहे वित्तीय वर्ष में 1273 करोड़ रुपये में से करीब 400 करोड़ मिल जाएंगे। यह रकम केन्द्र से मिलने के बाद भी दलित छात्र-छात्राओं का भला नहीं होने वाला। समाज कल्याण विभाग पहले अपने 1273 करोड़ रुपये के बकाए में केन्द्र से मिलने वाली राशि से समायोजन करेगा। इसके बाद जब यह पूरी रकम मिल जाएगी तभी दलित छात्र-छात्राओं को उनकी बकाया छात्रवृत्ति व फीस भरपाई की जा सकेगी। केन्द्र से मिलने वाली यह राशि 2012-13, 2013-14, 2014-15 और 2015-16 के वित्तीय वर्षों की है। प्रदेश में अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं को दी जाने वाली छात्रवृत्ति और फीस भरपाई में कुल 661 करोड़ 30 लाख रुपये का राज्य शेयर है, इसके ऊपर की जितनी भी राशि होती है उसे केन्द्र वहन करता है। गौतमबुद्धनगर के छात्र-छात्राओं का 2013-14 का करीब 15 करोड़ रुपया भी केंद्र से अब तक नहीं मिल पाया है जिसकी वजह से बच्चे फीस नहीं जमा कर पाए हैं। नतीजे में उनकी डिग्रियां और अंक तालिकाएं उनको नहीं मिल पाई हैं।

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