सरोकारों से सजे गीत संग्रह ‘सारे गीत तुम्हारे’ का विमोचन
प्रांजल पब्लिकेशन्स द्वारा रायबरेली के निराला सभागार में युवा गीतकार सौरभ शुक्ल का प्रथम गीत संग्रह 'सारे गीत तुम्हारे' का विमोचन हुआ। समारोह में कई प्रमुख साहित्यकारों ने भाग लिया। आचार्य ओम नीरव ने गीतों की महत्ता पर प्रकाश डाला। डॉ. अशोक अज्ञानी ने इस कृति में युवा और प्रौढ़ता का संगम बताया।

प्रांजल पब्लिकेशन्स की ओर से हिंदी संस्थान के निराला सभागार में रायबरेली के युवा गीतकार सौरभ शुक्ल के प्रथम गीत संग्रह "सारे गीत तुम्हारे" का विमोचन किया गया। समारोह में उत्तर प्रदेश ललित कला अकादमी के उपाध्यक्ष गिरीश चंद्र मिश्र, वरिष्ठ गीतकार अंजनी कुमार सिंह, प्रो. सूर्यप्रसाद दीक्षित, आचार्य ओम नीरव, डॉ. अमिता दुबे, डॉ. अशोक अज्ञानी और नैमिषारण्य तीर्थ के ब्रह्मर्षि पूज्य विमलानन्द सरस्वती ने पुस्तक का विमोचन किया। मुख्य वक्ता आचार्य ओम नीरव ने कहा कि गीत किसी उद्दीपित भाव की एक मर्यादित अविरल धारा है, मुखड़ा जिसका उद्गम है, अंतरे जिसके मनोरम घाट हैं, पूरक पद जिसके तटबंध हैं और समापन जिसका अनंत सागर में विलयन है।
नैमिषारण्य के संत ब्रह्मर्षि विमलानन्द सरस्वती ने कहा कि गीत हमारी अत्यंत प्राचीन विधा है जिसका उद्गम सामवेद से है। गीत की यह अविरल धारा युगों-युगों से प्रवाहित होती आ रही है।कवि डॉ. अशोक अज्ञानी ने कहा कि युवा स्वभाव के साथ ही प्रौढ़ता की झलक भी इस कृति के गीतों में मिलती है। गीतकार ने जहाँ एक ओर मर्यादा के साथ प्रेम को रेखांकित किया है, वहीं दूसरी ओर देश और समाज के विभिन्न सरोकारों को भी अपने गीतों में आत्मसात किया है। अध्यक्षता कर रहे प्रो. सूर्यप्रसाद दीक्षित ने कहा कि इस कृति के माध्यम से गीत के पुनरुद्धार के द्वार खुल रहे हैं। इस अवसर पर पीयूष सिंह (विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान के प्रतिनिधि) सहित पूरे अवध प्रांत से कई साहित्यकार उपस्थित थे।
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