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छात्र की अभिरुचि को जानकर ही उसका सर्वांगीण विकास संभव

लखनऊ। हिन्दुस्तान संवाद

अलीगंज सेक्टर क्यू स्थित सरस्वती विद्या मंदिर के सभागार में रविवार को जिला स्तरीय अखिल भारतीय विद्वत परिषद् की संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में वक्ताओं ने अच्छी शिक्षा के लिए विद्यार्थियों, शिक्षक व विद्यालय की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की।

संगोष्ठी में मुख्य अतिथि पूर्व माध्यमिक शिक्षा निदेशक कृष्ण मोहन त्रिपाठी ने कहा कि छात्रों का संवेगात्मक विकास होना चाहिए। उनकी अभिरुचि को जानकर खेल, व्यायाम और संगीत के माध्यम से उनका सर्वांगीण विकास किया जा सकता है। वक्ता राजेन्द्र सिंह ने कहा कि शिक्षण में तकनीक का प्रयोग कर हम विषय की ग्राहयता को बढ़ा सकते हैं। योग और प्राणायाम के द्वारा, शिक्षक जीवंत शिक्षण की कला से शिक्षण को रुचिकर बना सकता है। जय नारायण पोस्टग्रेजुएट कॉलेज के गणित विभागाध्यक्ष जय प्रकाश सिंह ने बताया कि विद्यालय के सर्वांगीण विकास में अभिभावक, छात्र एवं शिक्षक का बराबर का योगदान है। परन्तु शिक्षक को ही आगे बढ़कर नेतृत्व करना होगा ।

संगोष्ठी में गीतिका केशवानी ने अंग्रेजी शिक्षण के विषय में बताया की इससे हमारे व्यव्तिव का विकास होता है तथा भारतीय प्रतिभा का पलायन रुकता है।केन्द्रीय विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डा ब्रज मोहन मिश्र ने बताया कि सभी भाषाएँ एक दूसरे की पूरक हैं। विश्व के ज्ञान को प्राप्त करने के लिए अंग्रेजी आवश्यक है। विद्यालय के प्रधानाचार्य हरेराम पाण्डेय ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन आचार्य डा विद्यानन्द मिश्र जी ने किया।

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