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वायु प्रदूषण से आंख की रोशनी का खतरा

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लखनऊ। निज संवाददाता शहरों में वायु प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है। पांच साल में आउटडोर प्रदूषण में लगातार इजाफा हुआ है। गर्मी के साथ प्रदूषक तत्वों और नुकसानदायक गैसों से युक्त गर्म हवाएं चलती हैं। अध्ययन में यह बात सामने आई है कि शहरों में हवा (वायु) की गुणवत्ता इतनी खराब है, जो एक दिन में 40 सिगरेट पीने के बराबर है। वायु प्रदूषण से आंखों की रोशनी खराब होने का खतरा रहता है। यह जानकारी रविवार को एल्कॉन इंडिया के क्लीनिकल डेवलेपमेंट एवं मेडिकल अफेयर्स के प्रमुख डॉ. अरिंदम डे ने दी। कम बनते हैं आंसू राजधानी में एक जागरुकता कार्यक्रम में डॉ. अरिंदम ने बताया कि ग्लोबल वॉर्मिंग का पर्यावरण पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है। एयर क्वालिटी इंडेक्स अब तक के सबसे निचले स्तर पर है। खाने-पीने के मिलावटी सामान से बचने का हम सबके पास विकल्प है। लेकिन सांस लेने के लिए हवा की गुणवत्ता तय करने का कोई विकल्प नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार आउटडोर हवा के प्रदूषण में रहने से लाखों लोग मर जाते हैं। हवा की खराबी से आंखों की ग्रंथी में आंसू कम बनता है। कॉन्जेक्टिवाईटिस, केरेटाईटिस के अलावा फेफड़ों, गले व शरीर के अन्य अंगों में समस्या होती है। आंखों के लिए सनग्लास, पानी अधिक पिएं, फूड सप्लीमेंट में ओमेगा, विटामिन ए आदि का इस्तेमाल अधिक करें।

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  • Web Title:Risk of eye light from air pollution