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Hindi News उत्तर प्रदेश लखनऊसंशोधित--लखनऊ में आग बुझाने का इंतजाम 42 मीटर तक, 106 बिल्डिंगे इससे भी ऊंची

संशोधित--लखनऊ में आग बुझाने का इंतजाम 42 मीटर तक, 106 बिल्डिंगे इससे भी ऊंची

नोट:: प्रदेश का आंकड़ा अभी दिया जाएगा लखनऊ में 106 बिल्डिंगें 40 मीटर से ऊंची,

संशोधित--लखनऊ में आग बुझाने का इंतजाम 42 मीटर तक, 106 बिल्डिंगे इससे भी ऊंची
हिन्दुस्तान टीम,लखनऊTue, 28 May 2024 01:50 AM
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लखनऊ की आबादी और भारतीय भवन निर्माण संहिता (एनबीसी) के मुताबिक आग बुझाने के इंतजाम नाकाफी हैं। लखनऊ में 106 बिल्डिंगें 40 मीटर से ऊंची हैं और अग्निशमन विभाग के पास सबसे ऊंची वाटर हाइड्रोलिक 42 मीटर की है। हाईराइज बिल्डिगों में यदि दुर्घटना हुई तो विभाग असहाय हो जाएगा या फिर अपार्टमेंट के आग बुझाने के संयत्रों पर निर्भर हो जाएगा। इन सभी बिल्डंगों के लिए विभाग से एनओसी ली गई है। इसके इतर कई बिल्डिंगे बन रही हैं और कुछ का निर्माण पूरा हो चुका है। इन्हें शामिल कर लेंगे तो यह संख्या सवा सौ से ज्यादा हो जाएगी।

एनबीसी के 2016 के मानक के तहत दो लाख की जनसंख्या या पांच से सात किमी. के दायरे में एक फायर स्टेशन होना चाहिए। लखनऊ की जनसंख्या करीब 60 लाख है। मानक के अनुरूप शहर में 30 फायर स्टेशन होने चाहिए। जबकि हजरतगंज, चौक, इंदिरानगर, गोमतीनगर, पीजीआई, सरोजनीनगर, आलमबाग और बीकेटी समेत 8 फायर स्टेशन ही हैं। राजभवन और हाईकोर्ट में रिजर्व फायर स्टेशन हैं। यहां दमकल हमेशा खड़ी रहती है। अमीनाबाद में पूरे साल व गोसाईंगंज व महिलाबाद में सीजन में एक दमकल रहती है।

दो माह में शुरू होगा गोसाईंगंज फायर स्टेशन

सीएफओ मंगेश कुमार ने बताया कि गोसाईंगंज में फायर स्टेशन का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा था। प्रशासनिक भवन लगभग बनकर पूरा हो गया है। दो माह के भीतर फायर स्टेशन चालू हो जाएगा। सुशांत गोल्फ सिटी के अंसल सेक्टर-जी में सात हजार वर्ग फीट जमीन प्रस्तावित हो गई है। जल्द ही वहां भी कार्य शुरू कराया जाएगा। वहीं, मलिहाबाद में फायर स्टेशन बनवाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। अभी यहां जमीन प्रस्तावति नहीं हो पाई है। उन्होंने बताया कि काफी समय पहले चिनहट में फायर स्टेशन बनवाने के लिए विभाग की तरफ से प्रस्ताव भेजा गया था पर जमीन न मिल पाने के कारण फायर स्टेशन नहीं बन सका।

15 माले तक के इंतजाम और इमारतें 25 माले तक

अग्निशमन विभाग के पास आग लगने पर 15 माले तक आग बुझाने की व्यवस्था है। जबकि शहर में 25 मंजिला तक इमारतें तनी हुई हैं। इस बिल्डिंग के सबसे अंतिम माले में आग लगने के दौरान कोई फंस जाए तो उसकी जान बचाना मुश्किल हो जाएगा। अग्निशमन विभाग के पास दो हाईड्रोलिक प्लेटफार्म हैं। जो 42 मीटर ऊचाई तक आग बुझा सकती है।

पांच वर्ष में हुए अग्निकांड

2022 - 2039

2023 - 2429

2024 - 593 (30 अप्रैल तक)

कुल योग - 10493

तीन वर्ष में अग्निकांड में हुई 17 लोगों की हुई मौत

2022 - 08

2023 - 05

2024 - 05 (30 अप्रैल तक)

कुल योग- 18

तीन वर्ष में आग की लपटों के बीच बचाए गए लोग

2022 - 78

2023 - 184

2024 - 07 (30 अप्रैल तक)

कुल योग - 269

हाइड्रेंट्स का कुछ पता नही

शहर में आग बुझाने के लिये पानी की जरूरत पूरी करने के लिये पहले जगह-जगह हाइड्रेंट लगे थे। पर अब यह कहीं दिखते नहीं है। सड़के ऊंची होने के साथ ही यह हाइड्रेंट जमींदोज हो गए। अब इनका कुछ पता नहीं। अग्निशमन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि हाइड्रेंट जल संस्थान की देख रेख में संचालित होते थे। अब शहर में विभिन्न स्थानों पर बनने नलकूप, मेट्रो स्टेशन व जिन संस्थानों को एनओसी जारी की गई है उन जगहों से पानी भरा जाता है।

1352 को जारी हुई एनओसी

शहर भर में हजारों की तादाद में बहुमंजिला इमारतें, बारात घर, अस्पताल, स्कूल व व्यवसायिक प्रतिष्ठान हैं। जिसमें से 1352 प्रतिष्ठान ही आग से बचाव के मानक के अनुरूप हैं। जिन्हें अग्निशन विभाग की ओर से वर्ष 2024 में अब तक एनओसी जारी की गई है। जिसमें हाई राइज बिल्डिंग 106 (40 मीटर से ऊंची), स्कूल 863, अस्पताल 211 व व्यापारिक प्रतिष्ठान 172 हैं।

चार माह में 593 घटनाएं, 85 फीसदी शार्ट सर्किट से

जनवरी से लेकर अप्रैल तक शहर भर में छोटे-बड़े 593 अग्निकांड हुए हैं। जिसमें काफी नुकसान हुआ। अग्निशमन विभाग के मुताबिक करीब 85 प्रतिशत घटनाओं का कारण शार्ट सर्किट है। शार्ट सर्किट बिजली के तारों का मकड़जाल, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में समय-समय पर बिजली के उपकरणों की जांच न करवाना, घरों में पुरानी वायरिंग, ट्रांसफार्मर से सटकर दुकान व मकान बनवाना प्रमुख कारण है। सीएफओ मंगेश कुमार का कहना है कि जागरूक होकर आग की घटनाओं का काफी हद तक कम किया जा सकता है। ज्यादातर आग की घटनाएं लापरवाही के चलते ही होती हैं। एक बार घर पर वायरिंग कराने के बाद लोग दोबारा उसकी जांच ही नहीं करवाते हैं। बिजली के प्लक या उपकरण में स्पार्क हो तो उसे तुरंत बदलवा दें। एसी लगातार बुहत अधिक देर तक न चलाएं। लगातार एसी चलने से गर्म होकर कंप्रेशर दगने का डर रहता है। साथ ही व्यावसायकि प्रतिष्ठान को भी समय- समय पर उपकरण की जांच कराते रहना चाहिए।

आग लगने के प्रमुख कारण

. बिजली उपकरण व वायरिंग की नियमित सेफ्टी ऑडिट न होना

. एलपीजी गैस सिलेंडर पाइप का लीकेज

. कबाड़ डंप कर अनदेखी करना

. वेल्डिंग व कटिंग कार्य में लापरवाही बरतना

. उपकरणों व अन्य चीजों का उचित रखरखाव न होना

अग्निशमन विभाग में छोटी-बड़ी आग बुझाने की 46 गाड़ियां हैं

हाईड्रोलिक प्लेटफार्म - 2

एडवांस रेस्क्यू टेंडर - 1

वॉटर बाउजर - 4

फोम टेंडर - 3

वॉटर टेंडर - 12

मिनी फायर टेंडर - 11

वॉटर मिस्ट हाई प्रेशर व्हिकल - 5

बुलेट मोटरसाइकिल विद बैग पैक सिस्टम-8

जल्द ही रोबोट बुझाएगा आग

सीएफओ मंगेश कुमार ने बताया कि जल्द ही रोबोट की मदद से आग बुझाई जाएगी। रोबोट का परीक्षण कुछ समय पहले कराया जा चुका है। रोबोट को घटनास्थल से 500 मीटर दूर खड़ा अग्निशमन कर्मी रोबोट आपरेट करेगा। रोबोट के पिछले हिस्से में लगे पाइप में वाटर टेंडर कनेक्ट किया जाएगा। यह केमिकल से लगी आग, प्रतिष्ठान व घर के बेसमेंट में लगी आग बुझाने में बेहतर साबित होगा। साथ ही फायर सेफ्टी सूट खरीदने की भी कवायद चल रही है। यह सूट पहनकर फायर कर्मी आधा घंटे तक आग के बीच खड़े होकर राहत कार्य चला सकेगा। आग से फायर कर्मी को कोई नुकसान नहीं होगा।

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