
बोले लखनऊ एल्डिको टू सुफल
Lucknow News - बोले लखनऊ-एल्डिको-टू एल्डिको-2 कहने को ‘पॉश’ कॉलोनी, मूलभूत सुविधाएं कोसों दूर
बोले लखनऊ-एल्डिको-टू एल्डिको-2 कहने को ‘पॉश’ कॉलोनी, मूलभूत सुविधाएं कोसों दूर 16 साल से सड़क से लेकर जलनिकासी की समस्या से जूझ रहे लोग लखनऊ। वर्षों पहले लखनऊ की कॉलोनियां नगर निगम को सौंप दी गई थीं, लेकिन आज भी कई कॉलोनियां ऐसी हैं जहां आम लोगों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाएं नहीं पहुंची हैं। आलम यह है कि जल निकासी के लिए ड्रेनेज सिस्टम तक नहीं है। गड्ढों में तब्दील हो चुकी सड़कों की मरम्मत डेढ़ दशक से नहीं हुई है। 20 साल पहले डाली गई सीवर लाइन की सफाई न होने के कारण वे चोक हो गई हैं। नालियां या तो हैं नहीं, और यदि हैं भी तो कूड़े से पटी पड़ी हैं।
खाली प्लॉटों को लोगों ने कूड़ाघर बना लिया है। हम बात कर रहे हैं रायबरेली रोड से सटे एल्डिको-2 की, जहां लोग 16 वर्षों से रह रहे हैं और नगर निगम को बाकायदा टैक्स जमा कर रहे हैं। इसके बावजूद मूलभूत सुविधाएं कोसों दूर हैं। समस्याओं को लेकर स्थानीय लोग दो साल से लगातार संबंधित विभागों से पत्राचार कर रहे हैं, फिर भी नगर निगम जोन-8 के अंतर्गत 'इब्राहिमपुर वार्ड द्वितीय' के निवासी आज भी विकास की बाट जोह रहे हैं। पेश है रिपोर्ट... एल्डिको-2 एल्डिको ने कॉलोनी बनाई और नगर निगम को सौंप दी। नगर निगम ने लोगों से हाउस और वॉटर टैक्स वसूलना तो शुरू कर दिया, लेकिन बदले में मिलने वाली सुविधाएं 16 साल से नदारद हैं। रायबरेली रोड के ठीक सामने 'हाईवे प्लाजा' और उससे सटी कॉलोनी की हालत बहुत खराब है। वैसे तो इस कॉलोनी को 'पॉश कॉलोनी' की श्रेणी में रखा गया है, लेकिन यहां निवास करने वाले लोग जलभराव की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। बारिश के दिनों में जल निकासी न होने से पानी दुकानों और घरों में घुस जाता है। घुटनों तक पानी भरने के कारण लोग बारिश के दिनों में अपने घरों तक पहुंचने में भी कतराते हैं। यही नहीं, स्थानीय लोग बताते हैं कि ढाई साल पहले सड़क खोदी गई थी, लेकिन वह आज तक बन नहीं सकी। इस वजह से ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर अक्सर लोग गिरकर चोटिल हो रहे हैं। शिकायतकर्ता जी.के. सिंह बताते हैं कि वर्ष 2024 से वे लगातार इस समस्या को लेकर नगर निगम के अधिकारियों से मिल रहे हैं और उन्हें लिखित में अपनी समस्या बताई है। इसके बावजूद जर्जर सड़क, बरसाती नाली का निर्माण, साफ-सफाई और कूड़ेदान की व्यवस्था आज तक नहीं हो सकी। नालियों का स्तर (लेवल) ऊंचा-नीचा होने की वजह से घरों से निकलने वाला गंदा पानी कॉलोनी की नालियों में ही जमा रहता है। इससे मच्छर पनप रहे हैं और लोगों पर डेंगू व मलेरिया का खतरा मंडरा रहा है। सीवर चोक होने से उफनाने का डर दो दशक पहले सीवर लाइन डाली गई थी, लेकिन तब से आज तक इसकी सफाई नहीं हुई। बारिश के दिनों में सीवर उफनाने लगता है। आम दिनों में भी सीवर उफनाने का डर लोगों को सताता रहता है। ऐसी स्थिति में एल्डिको के निवासी सीवर की सफाई की गुहार लगा रहे हैं। शिकायत करने के हफ्ते भर बाद सफाईकर्मी आते भी हैं, तो मौके पर खड़े रहने पर ही काम करते हैं, वरना खानापूर्ति करके लौट जाते हैं। सफाईकर्मी काम करते हुए मोबाइल से फोटो खींचकर अधिकारियों को भेज देते हैं और काम पूरा होने की सूचना देते हैं, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और होती है। इसके कुछ ही दिनों बाद समस्या फिर खड़ी हो जाती है, क्योंकि जलनिकासी के लिए स्थाई रूप से कोई ड्रेनेज सिस्टम नहीं है। पास की झील भी सूख गई है, जिससे कॉलोनी का पानी झील में जाने के बजाय इधर-उधर जमा होता है। गंदे पानी का जमावड़ा होने से लोगों का पैदल चलना दूभर हो गया है। इन समस्याओं के निदान के लिए नगर निगम ज़ोन-8 के अधिकारियों को कई बार पत्र के माध्यम से अवगत कराया गया, लेकिन अभी तक कोई उचित कार्रवाई न होने से स्थानीय निवासियों में रोष है। बॉक्स में: सर्वे के बाद 34 लाख का अनुमान, लंबित है फाइल रायबरेली रोड पर हाईवे प्लाजा के ठीक पीछे रहने वाले जीके सिंह बताते हैं कि वे यहां 16 वर्षों से रह रहे हैं। जल निकासी की समस्या को लेकर वे नगर आयुक्त से लेकर महापौर तक से मिल चुके हैं। जोनल अधिकारी को भी ड्रेनेज की समस्या बताई गई, जिसके बाद जोन-8 के संबंधित अवर अभियंता अभिषेक कुमार की ओर से सर्वे कराया गया। सर्वे में 34 लाख रुपये के अनुमानित खर्च का प्रस्ताव बना, लेकिन यह प्रस्ताव पिछले आठ महीनों से लंबित पड़ा है। ऐसी स्थिति में शिकायतकर्ता ने मांग की है कि जर्जर सड़क एवं ड्रेनेज व्यवस्था के कार्य को इसी वित्तीय वर्ष में संपन्न कराने के आदेश पारित किए जाएं। साथ ही, प्रतिदिन समुचित साफ-सफाई और कूड़ेदान रखवाने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित करने की भी मांग की, जिससे आम लोगों की लंबित समस्याओं का निदान हो सके। कूड़े और झाड़ियों से पटे खाली प्लाट, स्वयं साफ करा रहे निवासी कॉलोनी में रहने वालों के सामने खाली प्लाट एक बड़ी समस्या बनकर उभर रहे हैं। इन खाली प्लाटों में लोग अपने घरों का कूड़ा फेंक रहे हैं, जिससे वहां बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई हैं। यहां मच्छर और बिच्छू हैं, जो लोगों के घरों में घुस जाते हैं। इस संबंध में भी जिम्मेदार अधिकारियों से पत्राचार किया गया, लेकिन सफाई नहीं हुई। कूड़ेदान की व्यवस्था नहीं होने के कारण स्थानीय दुकानदार भी सड़क पर कूड़ा डाल देते हैं, जिससे आसपास गंदगी फैली रहती है और कॉलोनी का वातावरण प्रदूषित बना रहता है। सड़क की सफाई के लिए कभी भी सफाई कर्मचारी नहीं आते। आलम यह है कि क्षेत्रीय पार्षद पिछले दो वर्षों से इस कॉलोनी में आए ही नहीं हैं। ऐसी स्थिति में कॉलोनीवासियों की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। जलनिकासी के लिए आधा दर्जन पत्र, पर समस्या बरकरार बरसाती पानी की निकासी के लिए कॉलोनी के लोगों ने पिछले दो वर्षों के दौरान आधा दर्जन बार लिखित शिकायतें कीं और जिम्मेदारों से मिलकर अपनी बात रखी, फिर भी इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। 14 जून 2024 को नगर निगम के मुख्य अभियंता को पत्र लिखकर समस्या से अवगत कराया गया। इसके अलावा 29 अप्रैल 2025, 11 जून 2025, 25 जून 2025 और 28 अगस्त 2025 को भी नगर आयुक्त को पत्र लिखे गए। लाख कोशिशों के बाद भी जल निकासी की व्यवस्था न होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। थोड़ी सी बारिश में ही तीन दिनों तक गंदा पानी भरा रहता है और रास्तों पर कीचड़ हो जाता है, जिससे पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। वर्षों पुरानी इस समस्या को लेकर जिम्मेदार अधिकारी मौन हैं। यही वजह है कि तमाम प्रयासों के बावजूद समस्या आज भी ज्यों की त्यों बनी हुई है। समस्याएं -जलनिकासी की कोई व्यवस्था नहीं होने से बरसात का पानी घुटने तक भर जाता है। -डेढ़ दशक पहले जो सड़क बनी थी, वह क्षतिग्रस्त हो गई रास्ता खराब हो गया है। -20 साल पहले सीवर लाइन बिछाई गई थी, सफाई नहीं होने से गंदा पानी फैल रहा है। -कूड़ादान नहीं होने से जगह-जगह कूड़ा फैला रहता है, पूरे क्षेत्र में गंदगी रहती है। -कॉलोनी की नालियां चोक होने से घरों से निकलने वाला गंदा पानी सड़क पर बह रहा है। समाधान -जल निकासी के लिए ड्रेनेज सिस्टम लगाया जाए, ताकि लोगों का आवागमन हो सके। -जर्जर सड़क की जल्द मरम्मत कराई जाए, ताकि लोग ऊबड़-खाबड़ रास्ते से बच सके। -कॉलोनी में सीवर लाइन की सफाई कराई जाए, जिससे सीवर उफनाने से बचा जा सके। -साफ-सफाई और कूड़ा उठाने की व्यवस्था बनाई जाए, ताकि लोग गंदगी से दूर रहे। -दो दशक पहले बनी नाली टूट गई है या चोक है, नाली की सफाई तत्काल कराई जाए। फैक्ट -रायबरेली रोड स्थित एल्डिको-टू कॉलोनी वर्ष 2000 में स्थापित की गई। -नगर निगम को वर्ष 2010 में कॉलोनी सौंपने के बाद कोई काम नहीं हुआ। -सीवर, सड़क, नाली, सफाई और जलभराव से ड़ेढ हजार लोग परेशान है। वर्जन-फोटो है- क्षेत्र बड़ा होने के नाते समस्याएं भी हैं। धीरे-धीरे लोगों की समस्या दूर करने की पूरी कोशिश की जा रही है। नाली और सड़क को लेकर काम शुरू कराया गया है, जहां-जहां गड़बड़ी होगी, वहां की सड़कें और नालियों को बजट की मंजूरी मिलने पर ठीक कराया जाएगा। मुस्कान भारती, पार्षद, इब्राहिमपुर वार्ड द्वितीय वर्जन-फोटो है- मुख्य सड़क ढाई साल पहले खोद दी गई। अभी तक सड़क नहीं बन पाई। जलनिकासी की बड़ी समस्या है। सीवर लाइन चोक है, कभी भी उफना सकता हैं। साफ-सफाई से लेकर कूड़ा उठाने की कोई व्यवस्था नहीं है। समस्याओं को लेकर कई बार शिकायत की गई। बावजूद इसके कोई सुधार नहीं हुआ। कृष्णा तिवारी, सचिव, आरडब्ल्यूए एल्डिको-2 ---------------- बोले लखनऊ 16 लोगों से बातचीत हमारी कॉलोनी में नियमित सफाई नहीं होती है। यह एक गंभीर समस्या है। सफाईकर्मी एक माह में बमुश्किल दो से तीन बार ही झाड़ू लगाने आते हैं, जिससे हर ओर गंदगी फैली रहती है। साथ ही सीवर सफाई की व्यवस्था भी चौपट है। लोग अपने निजी खर्च पर सीवर की सफाई करवाते हैं। ओम प्रकाश सिंह नगर निगम प्रशासन की अनदेखी की वजह से हम लोगों को यह लगता ही नहीं है कि हम लखनऊ में पॉश इलाके में रहते हैं। लाखों रुपए लेकर हमने जमीन खरीदी, मकान बनवाए। इलाके में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चौपट है। सफाई कर्मचारी अपनी मर्जी से महीने में एक-दो बार ही सफाई करने आते हैं। एके शर्मा नगर निगम हम लोगों से गृहकर, जल व सीवर कर के साथ सफाई के नाम पर प्रतिमाह रुपए ले रहा है। भारी-भरकम टैक्स लेने के बाद भी मूलभूत सुविधाएं तक मयस्सर नहीं है। सफाई के नाम पर खानापूर्ति होती है। हम लोग खुद ही घरों के बाहर झाड़ू लगाकर या पानी डालकर सफाई करने को मजबूर हैं। डीके सिंह कॉलोनी में कई नाली बंद हैं। इस वजह से पानी निकासी ठीक से नहीं हो पाती है। साथ ही जो नालियां खुली हैं, उनकी नियमित सफाई न होने से वहां काई तक जम गई है। हम लोग निजी खर्च या खुद ही नालियों की सफाई करते हैं। सफाई कर्मचारी माह में दो या तीन बार आकर रस्म अदायगी करके चले जाते हैं। डीपी त्रिपाठी कॉलोनी में साफ-सफाई की स्थिति बदतर है। सफाईकर्मियों को तो मैंने बहुत समय से देखा ही नहीं है। गंदगी की वजह से नालियों में कूड़ा फंस जाता है। इससे कूड़े का ढेर लग जाता है। इसके अलावा आए दिन सीवर उफनाने की समस्या बनी रहती है। विभागों को शिकायत के बाद भी स्थायी समाधान नहीं हो रहा है। कैफ हम लोग नियमित रूप से हजारों रुपए टैक्स भरते आ रहे हैं। रायबरेली रोड हाईवे से महज दो मीटर की दूरी पर कॉलोनी में हमारे मकान बने हैं। करीब 20-25 साल से हम लोग यहां रह रहे है, लेकिन बुनियादी सुविधाओं के लिए आज भी तरस रहे हैं। नियमित सफाई का अभाव और कर्मचारियों की मनमानी चलती है। आरके जैन मैं इतनी बुजुर्ग हूं कि सहारा लेकर चलना-फिरना पड़ता है। बारिश के दिनों में सबसे अधिक समस्या झेलनी पड़ती है। हमारी कॉलोनी में हल्की बारिश में पानी कमर तक भर जाता है। हम लोग घरों में कैद हो जाते हैं। पानी तीन से चार दिन में खत्म हो जाता है। सड़क भी खराब हो चुकी है। बहुत खराब स्थिति है। रेबा डे हमारी कॉलोनी के बगल में मार्केट जाने वाला मार्ग बहुत खराब है। इस मार्ग को कुछ समय पहले खोदा गया था। उसके बाद से उसका निर्माण नहीं कराया जा सका है। गिट्टी, रोड़ा बिखरा हुआ है। इस वजह से बाजार आने-जाने में बहुत दिक्कत होती है। हमेशा डर बना रहता है कि कहीं गिरकर चोटिल न हो जाएं। विमलेश कॉलोनी में आने-जाने का एक ही रास्ता है। दूसरा रास्ता बाजार की ओर से पैदल निकलने का है। बाजार के पीछे सड़क टूटी पड़ी है। इस रास्ते में आने-जाने में बहुत परेशानी उठानी पड़ती है। इलाके में मच्छरों का प्रकोप भी बहुत है। यह समस्या नियमित रूप से सफाई न होने की वजह से बनी हुई है। नियमित सफाई जरूरी है। गुड्डी गुप्ता इलाके में साफ-सफाई की कमी से बहुत परेशानी होती है। कभी नाली चोक हो जाती है तो कभी सीवर। नगर निगम और जलकल विभाग के अफसर टैक्स तो पूरा लेते हैं, पर, सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चौपट है। आए दिन सीवर चोक हो जाता है। भीषण दुर्गंध उठती रहती है। पैसे देकर निजी लोगों से सफाई करवानी पड़ती है। राजकुमारी कुशवाहा सबसे अधिक परेशानी बारिश के दिनों में होती है। हल्की सी बारिश में भी घुटनों तक पानी कॉलोनी में भर जाता है। सड़क जलमग्न हो जाती है। मेरे हिसाब से यह समस्या इसलिए है क्योंकि रायबरेली हाईवे की सड़क ऊंची है। कॉलोनी की सड़क और मकान नीचे की ओर बने हैं। इसका स्थायी समाधान करना होगा। कंचन कॉलोनी की बुनियादी समस्याओं पर कोई विभाग ध्यान नहीं दे रहा है। न नियमित सफाई होती है, न ही सफाईकर्मी आते हैं। माह में दो से तीन बार ही इलाके में झाड़ू लगती है। नगर निगम टैक्स लेकर भी सुविधाएं नहीं दे रहा है। कभी-कभी तो लगता ही नहीं कि हम लोग लखनऊ में रहते हैं। वंदना मिश्रा शहरी जीवन में ऐसी अव्यवस्था हम लोगों की उम्मीद से परे है। रोजाना सफाई न होना, आए दिन सीवर चोक हो जाने की समस्या हमारी कॉलोनी की मुख्य समस्या है। मानसून में जलभराव की वजह से स्थिति यह हो जाती है कि हम लोग तीन से चार दिन तक घर से बाहर ही नहीं निकल पाते हैं। राजीव चंद्रा कॉलोनी में खुले प्लॉट है, जहां गंदगी, झाड़ियां हैं। यहां पर कीड़े, सांप आदि निकल आते हैं। प्लॉट की सफाई हम कॉलोनी के लोग करवाते हैं। नगर निगम के अफसरों से कई बार कहा गया, लेकिन कोई भी सफाई नहीं करवाता है। इससे हमेशा डर बना रहता है कि सांप या कोई जहरीला कीड़ा घर तक पहुंचकर लोगों को काट न लें। सुमन सिंह मेरे घर के सामने वाली सड़क पूरी तरह से जर्जर है। करीब ढाई साल तक मैंने महापौर से लेकर नगर निगम और तमाम जगह पत्राचार कर सड़क बनवाने का अनुरोध किया, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। ऐसे में मैंने खुद 40 हजार रुपए खर्च कर अपने दरवाजे के आगे के कुछ हिस्से की सड़क बनवाई है। जीके सिंह हम विकास की बातें करते हैं, लेकिन यहां सफाई और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं गायब हैं। नियमित सफाई न होना और सफाई कर्मियों का माह में दो से तीन बार आना बड़ी लापरवाही है। कॉलोनी और बाजार के बीच की सड़क और हिस्सा हर तरह से अभाव में है। इतनी दुर्गंध रहती है कि इधर से निकलने का मन नहीं करता है। अमल डे

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