
बोले लखनऊ : ढाई दशक से सड़क, नाली का इंतजार
Lucknow News - लखनऊ के वृंदावन सेक्टर-7 में लोग दो दशक से मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। नगर निगम में शामिल होने के बाद भी सड़क, नाली, स्ट्रीट लाइट और साफ-सफाई जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। जलभराव और गंदे पानी की वजह से लोग बीमारियों का शिकार हो रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं मिल रही है।
लखनऊ में वृंदावन का इलाका वैसे तो काफी बड़ा है। लेकिन कई सेक्टर ऐसे हैं, जहां विकास के नाम पर लोग अपने आपको ठगा महसूस कर रहे हैं। इनमें वृंदावन सेक्टर-7 सी शहीद पथ के किनारे स्थित है। यहां पर लोग दो दशक से ज्यादा समय से निवास कर रहे हैं। शुरू में आवास विकास के अंतर्गत यह क्षेत्र आता था, जो वर्ष 2018 में नगर निगम को सौंप दिया गया। नगर निगम जोन आठ के अंतर्गत खरिका द्वितीय वार्ड बन गया। हजारों की संख्या में वोटर बन गए। पार्षद भी चुन लिया गया, लेकिन यहां 23 साल से निवास करने वाले लोग आज भी सड़क, नाली, स्ट्रीट लाइट व साफ-सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं की बाट जोह रहे हैं।
लोगों ने बताया कि नगर निगम में शामिल हुए आठ साल गुजर गए। लेकिन यहां पर सुविधाएं नहीं हैं। लखनऊ। तीस फीट रोड को आवास विकास ने मंजूरी दे दी। लेकिन यह रोड आज तक बनी नहीं। इसके पीछे की वजह यह है कि आवास विकास और नगर निगम के बीच सीमा विवाद में सड़क निर्माण कार्य अटका हुआ है, जिसका खामियाजा बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक भुगत रहे हैं। शहीद पथ से सटे हुए इस इलाके में किस रास्ते जाना है। स्थानीय लोगों के अलावा और कोई नहीं समझ सकता। क्योंकि मुख्य रास्ता बना नहीं है। ऊबड़-खाबड़ कच्चे रास्ते से लोग अपने घरों तक पहुंचने के लिए मजबूर हैं। यहीं नहीं नाली का निर्माण नहीं होने से घरों से निकलने वाला पानी कच्चे रोड पर बह रहा है। लोगों का पैदल चलना दूभर है। शादी-ब्याह जैसे कार्यक्रम में लोग खुद के पैसों से मलबा डलवाकर रास्ते को पक्का करते हैं। सड़क की समस्या से जूझ रहे लोग जब आवास विकास में शिकायत करते हैं तो कहा जाता है कि यह मामला नगर निगम क्षेत्र में आता है। वहीं जाकर शिकायत करिए। यहां सड़क, नाली, पीने का पानी, साफ-सफाई, स्ट्रीट लाइटें, सीवर तक नहीं होने से लोगों का जीवन नर्क के सामान हो गया हैं। यहीं नहीं वृंदावन के लोग जलभराव की भी समस्या से जूझ रहे हैं। बगल से गुजरा नाला सेक्टर सात से जोड़ा नहीं गया है। इस वजह से हर बारिश में घुटने तक पानी भरने से लोगों का आना-जाना तक बंद हो जाता हैं। बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं तो घरों में कैद हो जाते हैं। बारिश के दिनों में जलभराव की वजह से नाते रिस्तेदार से लेकर आसपास के लोग आना बंद कर देते हैं। उन्हें इस बात का डर सताता है कि कहीं बारिश के बीच बने गड्ढे में गिरकर चोटिल न हो जाए। ऐसी ढेरों समस्याओं से वृंदावन के लोग दो दशक से जूझ रहे हैं। स्मार्ट सिटी में लोगों की डगर कच्ची रोड पर : कहने को तो लखनऊ को स्मार्ट सिटी का दर्जा मिला है। लेकिन इसकी हकीकत देखना है तो वृंदावन जरूर आएं। यहां पर लोगों की डगर कच्ची रोड से होकर गुजरती है। कच्ची सड़क गड्ढों के बीच से होकर गुजरती है। जहां सेक्टर सात का पानी इसी गड्ढे में भरता हैं। बारिश में तो कच्ची रोड नजर नहीं आती हैं। दूरदराज से आने वाले लोग गांव से बदतर जीवन गुजारने जैसी बात करते हैं। पाइप लाइन क्षतिग्रस्त होने से लोग गंदा पानी पीने को विवश वृंदावन सेक्टर 7 चिरैयाबाग में पानी का पाइप कई माह से क्षतिग्रस्त हैं। इस वजह से तालाब का गंदा पानी पाइप लाइन के जरिए गांव तक पहुंच रहा है और गांव के लोग गंदा पानी पीने के लिए मजबूर है। इस संबंध में स्थानीय लोग नगर निगम से लेकर जलकल विभाग के चक्कर काट चुके हैं। बावजूद इसके पाइप लाइन की मरम्मत आज तक नहीं हो सकी है। लिहाजा हजारों की आबादी में निवास करने वाले लोग गंदे पानी के चलते बीमारी के चपेट में आने लगे है। कई घरों में तो बच्चे पेट दर्द से परेशान हैं। यहीं नहीं चिरैयाबाग की नालियां बंद होने से घरों से निकलने वाला गंदा पानी कच्ची रोड पर बह रहा है। गंदे पानी के ठहराव से मच्छर पनप रहे हैं। लोगों को डेंगू मलेरिया जैसी बीमारी के चपेट में आने का खतरा मंडरा रहा है। कॉलोनी में भैंसों के तबेलों से रास्ते भर गोबर, पैदल चलना हुआ दूभर पहले मकान कम बने थे तो लोगों ने भैंसों का तबेला बना लिया। धीरे-धीरे आवास विकास के बनाए गए मकानों में लोग रहने लगे। अब कॉलोनी के बीच भैंसों का तबेला होने से हर रास्ते पर गोबर का ढेर लग रहा है। जहां चारों ओर गंदगी फैली रहती हैं। लोगों का आना-जाना दूभर हो गया है। बीच रास्ते भैसें बैठी रहती हैं। हटाने पर लोग विवाद करते हैं। पैदल और बाइक से आने वाले लोग अक्सर गाय-भैंस से भिड़कर घायल हो रहे हैं। बिजली के खंभों में जानवर बांधते हैं। कॉलोनी के दोनों तरफ नाली है। उसी में गोबर का मलबा जाने से नाली भी चोक हो गई है। इससे घरों से निकलने वाला पानी नाली के रास्ते जाने के बजाय उफनाकर लोगों के घरों के सामने से बह रहा है। इस मामले में भी स्थानीय लोगों ने पुलिस से शिकायत की है। इसके बावजूद भैसों का तबेला नहीं हटने से लोगों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रस्तुति : अवनीश जायसवाल, निशीकांत त्रिवेदी बोले लोग ---------------- कॉलोनी में सप्लाई का पानी पीने लायक नहीं रहता। आसपास ही दो हैंडपंप लगे हैं, लेकिन दोनों खराब पड़े हैं। कोई भी जिम्मेदार समस्या का निवारण नहीं करता। -कुसुम पाठक पार्क के नाम पर खंडहर है। रोजाना सांप-बिच्छू निकलते हैं। पार्क में बैठने में भी डर लगता है। एक बार तो मैं ही सांप के डसने से बाल-बाल बचा हूं। -कमलाकांत तिवारी रास्तों में गोबर के ढेर लगे हुए हैं। आने-जाने का रास्ता बाधित होता है, लेकिन प्रशासन से कोई यहां झांकने तक नहीं आता। कई बार रात के अंधेरे में मैं खुद गिर पड़ा। -अखिलेश पाठक स्ट्रीट लाइटें नहीं लगी हैं। कॉलोनी में शाम होते ही अंधेरा छा जाता है। कई बार ऐसा हुआ है जब कॉलोनी वाले खुद से चंदा लगाकर लाइटें लगवा चुके हैं। लाइट की समस्या बनी रहती है। -शोएब बोले जिम्मेदार -------------- अभी तीन हैंडपंप लगवाई हूं। दो पुराने हैंडपंप का जलस्तर नीचा हो गया है। इसलिए मरम्मत नहीं हो सकती। बात रही स्ट्रीट लाइट की तो कोई बताएं तभी लगेगा। पार्क अभी आवास विकास ने नगर निगम को सौंपा नहीं है। लिखा पढ़ी करें तो फाइल को आगे बढ़ाएंगे। रजनी अवस्थी, पार्षद, खरिका द्वितीय वार्ड

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