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शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए तैयार हो नियामक मंच

अभिभावकों को अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए कितनी ही तकलीफों का सामना करना पड़ता है। सही दिशा और मार्ग नहीं मिल पाने से बच्चों का भविष्य अंधेरे में जा रहा है। सरकारी स्कूल की फीस कम है तो बिल्डिंग और पढ़ाई अच्छी नहीं है। प्राइवेट स्कूलों की फीस महंगी है तो मानकों की अनदेखी है। वहीं, हर गली नुक्कड़ पर छोटे प्राइवेट स्कूल परचून की दुकान की तरह खुल गए हैं। कहीं टीचर अच्छे नहीं मिलते तो कहीं गुणवत्ता वाली शिक्षा। अभिभावक इन सब में फंस कर रह जाता है। इन्हीं समस्याओं को लेकर गुरुवार को गोमतीनगर स्थित एक होटल में राइट वॉक फाउंडेशन(आरडब्ल्यूएफ) और यूनीसेफ की तरफ से एक दो दिवसीय परिचर्चा का आयोजन किया।

यूनीसेफ और आरडब्ल्यूएफ ने एक प्लेटफार्म पर खड़े होकर परेशानियों से निपटने के लिए एक नियामक मंच तैयार करने की बात कही, जिसमें सभी को एक सामान रखा जाए , ताकि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदेश स्तर पर विद्यालयों में मिल सके। इस परिचर्चा में प्राइवेट स्कूलों के प्रबंधक, टीचर, अभिभावक और सरकारी शिक्षा तंत्र के अधिकारियों को भी शामिल किया गया। परिचर्चा में सभी लोगों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया और अपने विचारों का आदान-प्रदान किया। मौके पर मौजूद लोगों के सुझावों को लेकर एक पीपीटी भी तैयार की गई। शुक्रवार को इसे बेसिक शिक्षा के एडिशनल चीफ सेकेट्री राज प्रताप सिंह और बेसिक व माध्यमिक शिक्षा के मंत्री संदीप सिंह के समझ प्रस्तुत भी किया जाएगा।

इस मौके पर सेंट्रल स्क्वायर फाउंडेशन के रोहित मेहता, माध्यमिक शिक्षा के संयुक्त निदेशक विष्णुकांत पांडे, उप निदेशक विकास श्रीवास्तव, बेसिक शिक्षा की संयुक्त निदेशक ललीता प्रदीप पांडे, अभिभावक संघ के तुषार पोकरियाल समेत अभिभावक भी मौजूद थे।

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