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राशन वितरण ठप, हड़ताल पर गए कोटेदार

डोर स्टेप डिलवरी में धांधली व आधार के जरिए वितरण व्यवस्था से परेशान सैकड़ो राशन दुकानदारों (कोटेदारों) ने शनिवार को कामकाज ठप कर हड़ताल पर चले गए। वितरण के पहले ही दिन करीब 80 फीसदी दुकाने से राशन नहीं बंट सका। अधिकारियों के दबाव में कुछ दुकाने खुली लेकिन यहां भी आंशिक वितरण हुआ। इससे राशन लेने आए हजारों लोगों को घंटो खड़े रहने के बाद मायूस होकर लौटना पड़ा। आपूर्ति विभाग की अनदेखी से बेहाल कोटेदार शनिवार से हड़ताल कर दी। कोटेदारों का कहना था कि विभाग उनकी किसी भी मांग पर विचार तक नहीं कर रहा है। इधर, बिना आधार के वितरण न किए जाने के आदेश के बाद कार्डधारकों के अंगूठे का मिलान न हो पाने और मिट्टी के तेल के दाम मशीनों में दर्ज न किए जाना कोटेदारों के लिए सिरदर्द बन गया था। पात्र कार्डधारक होने के बावजूद मशीन द्वारा उसकी पहचान न किए जाने से आए दिन दुकानों पर बवाल की संभावना बन रही थी। कार्डधारक भी हर रोज इस नई चिकचिक से परेशानी झेल रहे हैं। अधिकांश इलाको में बंद रही राशन दुकाने शनिवार को राजधानी के अधिकांश इलाकों में राशन दुकानदार हड़ताल पर रहे। दुकानदारों ने नोटिस बोर्ड पर अनिश्चित कालीन हड़ताल की सूचना चस्पा कर दी। चौक, तेलीबाग, आलमबाग, यहियागंज, गोमतीनगर, राजाजीपुरम में अधिकांश दुकाने बंद रही। काकोरी जैसे ग्रामीण क्षेत्र में हड़ताल से वितरण ठप रहा। अन्य इलाकों में भी आंशिक वितरण ही हुआ। उत्तर प्रदेश सस्ता गल्ला विक्रेता परिषद के अध्यक्ष अशोक कुमार मेहरोत्रा ने अपनी मांगों के संबंध में एक ज्ञापन भी एडीएम आपूर्ति को सौंपा। वह बताते हैं कि डोर स्टेप डिलिवरी का पालन नहीं किया जा रहा है। बोरे समेत अनाज तौल कर दिया जाता है। दुकानदार ही पल्लेदारों की लदाई व उतराई का भुगतान कर रहे हैं। 20 से 25 रुपए प्रति कुंतल का भाड़ा भी लिया जा रहा है। ऐसे में कोटेदार पिसा जा रहा है। शासन तक शिकायतों के बावजूद इसका कोई हल नहीं निकल सका है। कोटेदारों का उत्पीड़न बंद होना चाहिए। उन्होंने बताया कि पॉस मशीने ठीक ढंग से काम नहीं कर रही। अंगूठे का निशान मशीने नहीं ले रही हैं। आधार की फीडिंग अभी तक पूरी नहीं हुई है। ऐसे में आधार से वितरण की जिम्मेदारी कोटेदारों के मत्थे थोप दी गई। कोटेदारों ने आरोप लगाया कि उन्हें 70 रुपए प्रति कुंतल लाभांश दिया जाता है। जो कि बोरे उतरवाने और भाड़ा देने में ही चला जाता है। ऐसे में कोटेदार क्या कमाए क्या खाए। विभाग की इस व्यवस्था से कोटेदार और कार्डधारक दोनों परेशान हैं। जब तक समस्या का समाधान नहीं होता राशन दुकानदार हड़ताल पर रहेंगे।

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