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रमजान स्पेशल : पड़ोसी मुल्क नेपाल में बढ़ी भारतीय इमामों की मांग

feastival of Kurbani Eid ul Jauha celebrated with pomp and prayers in mosques

पवित्र माह रमजान में पड़ोसी मुल्क नेपाल में भी भारतीय ‘इमामों’ और ‘मोअजिज्नों’ की डिमांड बढ़ी है। इमाम मस्जिदों में पंचगाना नमाज के साथ तरावीह की नमाज अदा कराते हैं और मोअज्जिन अजान देते हैं। मोअजिज्जन एक तरह से इमाम का सहयोगी होता है। उसकी गैरहाजिरी में नमाज भी अदा कराते हैं। अरबी में माहिर ऐसे हाफिज (जिन्हें कुरआन याद होता है) और कारी (जो खूबसूरत अंदाज में कुरआन पढ़ते हैं) की पड़ोसी मुल्क नेपाल में मांग ज्यादा है।

नेपाल में भारतीयों को खास तवज्जो (महत्व) दिया जाता है। वजीरगंज के दीनी मदरसों से पढ़कर निकले तालिबइल्मों को यहां अच्छे मौके मिल जाते हैं। नेपाल के कई जिलों की मस्जिदों में नमाज तरावीह पढ़ाने के लिए अपने यहां भारतीय इमाम रखना चाहते हैं।

नेपाल गये कई इमाम : इमाम और मोज्जिन के बढ़े संकट के बीच नेपाल के कई मस्जिदों में तरावीह की नमाज पढ़ाने के लिए गये है। नेपाल के कई जिलों के मस्जिदों के इमामों ने वॉट्सएप, फेसबुक, ट्विटर और दूरभाष के माध्यम से इमाम और मोअज्जिन को तरावीह की नमाज पढ़ाने की  सूचना दी थी। 

क्या थीं शर्तें : नेपाल के इमामों ने चयन के लिए कई खास शर्तें रखी हैं। जैसे दुरुस्त अकीदा हो, मुकम्मल हिफ्ज कुरआन, उम्र 20 से 40 साल के बीच, पान, गुटखा, बीड़ी और ऐसी ही नशीली वस्तुओं का सेवन न करता हो।

किन-किन जिलों में विशेषज्ञों की मांग:
नेपाल में भारतीय इमाम हैं लेकिन इनकी संख्या कम है। बांके, वरदिया, पालपा, कृष्णानगर और नेपाल की राजधानी काठमांडू में भारतीय इमामों की ज्यादा मांग है। वजीरगंज के इमाम और मोअज्जिन काफी संख्या में नेपाल की मस्जिदों में  नमाज-ए-तरावीह पढ़ाने गये हैं।

क्या है आम राय
कस्बे की एक मस्जिद के इमाम मौलाना रहमतउल्ला बेग का कहना है कि अपने मुल्क के उनके एक दोस्त नेपाल की राजधानी काठमांडू की मस्जिद में इमाम हैं। बताया कि उनके पास भी कई बार ऑफर आए लेकिन वतन से मोहब्बत के कारण हिम्मत नहीं कर सके। दूसरा सभी की अपनी घर-परिवार की भी दिक्कतें होती हैं। इस नाते ज्यादातर लोग बाहर जाने में कतराते हैं।

वजीरगंज में एक दर्जन से अधिक दीनी मदरसे
 वजीरगंज में एक दर्जन से अधिक मदरसे संचालित  हैं। इनमें 2 मदरसे सरकारी वित्तपोषित तथा आधा दर्जन मान्यताप्राप्त हैं। बाकी मदरसे किसी न किसी मान्यताप्राप्त मदरसों से संबद्ध हैं। यहां आधा दर्जन बड़े मदरसों में उच्च स्तरीय दीनी तालीम दी जा रही है।

क्या कहते है प्रवक्ता 
नेपाल में पवित्र माह रमजान में भारतीय इमाम और मोअज्जिनों की संख्या बढ़ी है। इसकी एक वजह अरबी भाषा की अच्छी समझ और साफ उच्चारण भी है। नेपाल में भारतीय इमामों और मोअज्जिनों की खास पहचान है। 
मौलाना अब्दुल वहीद,मदरसा गौसिया वजीरगंज

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  • Web Title:Ramzan Special: Neighboring country demands Indian Imams in Nepal