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रमजान की फजीलत

रमजान की बेपनाह फजीलत है। कुरान में कहा गया कि नफ्स को पाक करने के लिए रोजे को वाजिब किया गया है। खुद रसूल ए खुदा ने कहा कि बेहतर सेहत के लिए रोजा रखो। इस महीने में बंदा अपने अल्लाह से करीब हो जाता है। फिर वह जो दुआ मांगता है। अल्लाह उसको रद्द नहीं करता है। अल्लाह से अपने गुनाहों की तौबा करना चाहिए। इस माहे मुबारक में गरीबों पर खास ध्यान देना चाहिए। रोजा इस लिए भी होता है कि हम दूसरों की भूख और प्यास को समझ सके।

मौलाना सैय्यद मुनव्वर हुसैन

अल्लाह का सबसे पंसदीदा महीना माहे रमजान है। इसमें अल्लाह अपने बंदों के गुनाहों को माफ कर देता है और नेकियों के बदले सवाब को 70 गुना तक बढ़ा देता है। इस महीने में हमें ज्यादा से ज्यादा अल्लाह की इबादत करना चाहिए। अल्लाह ने रोजा सिर्फ भूख और प्यास का नहीं बनाया है। बल्कि पूरे जिस्म का रोजा होता है। हमें रोजे में जबान से किसी की बुराई नहीं करना चाहिए, किसी को बुरा नहीं कहना चाहिए और हराम माल खाने से बचना चाहिए।

मौलाना जुनैद असलम नदवी

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