शिक्षक भर्ती में आरक्षण की अनदेखी पर राजभवन ने केजीएमयू से मांगा जवाब
-सांसद बृजलाल ने राजभवन को लिखे पत्र में आरक्षण एवं रोस्टर का पालन न करने

-सांसद बृजलाल ने राजभवन को लिखे पत्र में आरक्षण एवं रोस्टर का पालन न करने का लगाया आरोप
लखनऊ। कार्यालय संवाददाता
केजीएमयू में सहायक आचार्य के पद पर होने वाली भर्ती प्रक्रिया में दोबारा से आरक्षण का अड़ंगा लग सकता है। शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के साक्षात्कार छह अक्टूबर से चल रहे हैं। भाजपा राज्यसभा सांसद बृजलाल ने भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण और रोस्टर का पालन न करने का आरोप लगाते हुए राजभवन को पत्र भेजा है। राजभवन ने केजीएमयू प्रशासन ने जवाब मांगा है।
केजीएमयू प्रशासन ने शिक्षकों के विभिन्न पदों पर एक साल पहले विज्ञापन निकाला था। केजीएमयू के शिक्षकों ने विज्ञापन में आरक्षण और रोस्टर प्रक्रिया का पालन न करने का आरोप लगाया था। अनुसूचित जाति वर्ग के प्रतिनिधि सदस्य के बिना हस्ताक्षर और सहमति के ही रोस्टर का निर्धारण करने का आरोप था। आरोप है कि अनुसूचित जाति वर्ग को 21 प्रतिशत के बजाय सिर्फ 8.8 प्रतिशत, पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत के बजाय 12.6 प्रतिशत और एसटी अभ्यर्थियों को दो प्रतिशत के बजाय शून्य पद मिल रहे हैं। अनुसूचित जाति आयोग के हस्ताक्षेप पर केजीएमयू ने संशोधित विज्ञापन जारी किया। फिर भी शिकायकर्ता संतुष्ट नहीं हुए। छह अक्तूबर से भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी। शिकायत पर राजभवन ने केजीएमयू प्रशासन से जवाब तलब किया है। केजीएमयू ने शिक्षक भर्ती के लिए हाल में 256 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया था। केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. सुधीर सिंह का कहना है कि नियमों के तहत भर्ती प्रकिया की कार्यवाही चल रही है। सभी पहलुओं की जांच पड़ताल के बाद ही विज्ञापन जारी किया गया है।
