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6 अगस्त, 2020|7:27|IST

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रेलवे यूनियन नेताओं से बातचीत

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लखनऊ। निज संवाददाता - बजट रेल और सरकारी कर्मचारियों के बिल्कुल विपरीत है। कर्मचारियों की पेंशन और वेतन को लेकर कोई चर्चा नहीं है। नए स्लैब में कोई छूट नहीं है। सरकारी कर्मचारी पेंशन और वेतन से माता-पिता अथवा बच्चों के नाम पर बीमा में निवेश कर पैसे बचाता था, वह छूट नए स्लैब में शामिल होने पर खत्म हो जाएगी। हालांकि, आम आदमियों के लिए छूट का दायरा बढ़ना राहत है। रेल बजट में निराशा हाथ लगी है। कर्मचारी हितों पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया गया है। आरके पांडेय, मंडल मंत्री, एनआरएमयू - आजादी के बाद बहुत कम समय में लोकतंत्र मजबूत हुआ। जात-पात व धार्मिक भेदभाव कम करने में भारतीय रेल का बड़ा योगदान है। देश में 80 फीसदी जनता गरीब है। ऐसे में सस्ते परिवहन की उम्मीद की पूर्ति केवल रेलवे से होती है। मगर, पंजीपतियों और विदेश निवेश को बढ़ावा देकर तथा 150 प्राइवेट ट्रेनें चलाकर यात्रियों से महंगा किराया वसूला जाएगा। इससे सस्ते, सुगम और सुरक्षित परिवहन का एकलौता जरिया आमयात्रियों से छिन जाएगा। बजट के माध्यम से प्राइवेट ट्रेन और चार स्टेशनों का पीपीपी माध्यम से निजीकरण केवल और केवल लोकतंत्र के वजूद को नष्ट करना है। विद्यानाथ यादव, मंडल अध्यक्ष, यूआरएमयू - बजट में रेल कर्मचारियों के लिए कुछ भी नहीं है। बजट में इनकम टैक्स के नए स्लैब में विकल्प दिया है। नए स्लैब से रेलकर्मचारियों को कहीं फायदा नहीं दिखाई देता। कैलकुलेटर पर मात्र तीन से चार हजार रुपये का ही फायदा मिलेगा। बजट घोर निराशाजनक है। पूंजीपतियों को बढ़ावा देने की कोशिश है। रवि भूषण सिन्हा, मंडल अध्यक्ष, यूआरएमयू - बजट दिखावे के लिए बना है। रेलकर्मचारियों को कोई लाभ नहीं मिला है। वेतन और पेंशन को लेकर चल रही समस्याओं का कोई हल नहीं निकला है। खाली पड़े पदों को भरने को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई। रेलकर्मी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। ट्रैक के किनारे खाली पड़ी जमीनों पर सोलर प्लांट लगाने से रेलकर्मचारियों को फायदा नहीं मिलने वाला। एक तरफ कौशल विकास को बढ़ावा देने की बात हो रही हैं। वहीं, कुशल कारीगरों का लाभ आगे रेलवे को नहीं बल्कि प्राइवेट फर्म उठाएंगी। पूरा बजट लोक लुभावन है। अजय कुमार वर्मा, मंडल मंत्री, एनईआरएमयू

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  • Web Title:Railway s union interaction on rail budget