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ट्रिपल-पी मॉडल से सुधरेंगी बदहाल रेलवे कालोनियों की सूरत

रेलवे कर्मचारी कालोनियां जल्द ही नए कलेवर में नजर आएंगी। रेलवे ने बदहाल कालोनियों को सुधारने की तैयारी की है। इसके लिए ट्रिपल-पी(पीपीपी-पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर कालोनियों की सूरत बदली जाएगी। आपके अपने लोकप्रिय अखबार ‘हिन्दुस्तान ने हाल ही में उत्तर रेलवे लोको शेड व पूर्वोत्तर रेलवे लोकोशेड मवैया की कालोनियों की बदहाल दशा को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद कालोनियों का निजीकरण कर सुधार की बात सामने आने की खबर से आवंटियों में खुशी की लहर है। उत्तर रेलवे के पास करीब 35 कालोनियां हैं जबकि पूर्वोत्तर रेलवे के पास बादशाहनगर और ऐशबाग रेलवे कालोनी मौजूद हैं।

शनिवार को राजधानी पहुंचे अध्यक्ष रेलवे बोर्ड अश्वनी लोहानी ने यह जानकारी देते हुए बताया कि रेलवे कालोनियां बहुत पुरानी हो चुकी हैं। इनमें सुधार कराना मुश्किल होता जा रहा है। कुछ कालोनियों की हालत बहुत ही दयनीय है। इनमें सुधार के लिए कालोनियों का निजीकरण होगा। कालोनियों को ठेके पर देकर सुधारा जाएगा। इससे कालोनियों की हालत में व्यापक सुधार देखने को मिलेंगे।

रेलवे कालोनियों में रहने वाले कर्मचारियों की हालत बदतर है। यहां जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं है। बारिश के दिनों में कालोनियों में पानी भर जाने से आफत टूट पड़ती है। कालोनी में घरों के दरवाजे तक उखड़ गए हैं। इनको ठीक कराने के लिए कर्मचारियों को जुगाड़ करना पड़ता है।

कालोनियों का रखरखाव न होने से घरों की दीवारें तक चिटक गई हैं। उत्तर रेलवे की चारबाग हैदर कैनाल, लोको शेड, सेवाग्राम कालोनियां जर्जर स्थिति में हैं। रेलवे इन कालोनियों की मरम्मत के लिए आने वाले पैसा भी कालोनियों पर खर्च नहीं कर पा रहा है। इससे यहां के कर्मचारियों का जीना दूभर हो गया है।

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  • Web Title:Railway