
बलरामपुर में ऑपरेशन से पहले होने वाली खून की जांच बंद
संक्षेप: Lucknow News - बलरामपुर अस्पताल में पीटीपीसी आईएनआर जांच बंद हो गई है, जिससे मरीजों को निजी पैथोलॉजी केंद्रों पर दौड़ लगानी पड़ रही है। जांच के रीजेंट की कमी के कारण यह समस्या दो महीने से जारी है। अस्पताल की निदेशक ने इसकी जानकारी नहीं होने की बात कही है।
बलरामपुर अस्पताल में खून का थक्का जमने की स्थिति का पता लगाने वाली अहम जांच पीटीपीसी आईएनआर बंद हो गई है। इसकी वजह से मरीजों को निजी पैथोलॉजी केंद्र तक दौड़ लगानी पड़ रही है। अस्पताल के अधिकारियों से शिकायत के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। सूत्रों की माने तो रीजेंट उपलब्ध न होने से जांच करीब दो माह से बंद है। डॉक्टर किसी भी मरीज के ऑपरेशन से पहले यह जांच करवाते हैं। बलरामपुर अस्पताल में 776 बेड हैं। प्रदेश के किसी भी जिला अस्पताल में इतने अधिक बेड नहीं हैं। रोजाना पांच से सात हजार मरीज अस्पताल की ओपीडी में आ रहे हैं।

अस्पताल में करीब 20 से 30 फीसदी मरीजों की पीटीपीसी आईएनआर जांच कराई जाती है। ऑपरेशन से पहले (प्री सर्जिकल जांच) सभी मरीजों की यह जांच अनिवार्य रूप से कराई जाती है। इस जांच से खून का थक्का जमने की स्थिति का पता लगाया जाता है। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही ऑपरेशन तय किया जाता है। काफी समय से बलरामपुर अस्पताल में यह जांच ठप है। जनरल सर्जरी विभाग में ऑपरेशन से पहले लखीमपुर निवासी सतीश को पीटीपीसी आईएनआर जांच लिखी गई। उन्होंने अस्पताल में खून का नमूना दिया, लेकिन उन्हें जानकारी दी गई कि पीटीपीसी आईएनआर जांच बंद है। ऐसे ही संडीला निवासी रामू की भी पीटीपीसी आईएनआर जांच नहीं हो सकी। इन दोनों मरीजों ने खून की जांच बाहर निजी केंद्र पर करवाई। निजी पैथालॉजी में पीटीपीसी आईएनआर जांच के लिए मरीजों को 450 से 500 रुपए तक खर्च करने पड़ रहे हैं। साथ ही दो बार खून निकलवाना पड़ रहा है। अस्पताल की निदेशक डॉ. कविता आर्या का कहना है कि जांच ठप होने की जानकारी नहीं है। कल इसकी जानकारी लेती हूं।

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