सभी केंद्र:: खामेनेई की मौत के बाद पुराने लखनऊ में उबाल

Mar 01, 2026 10:34 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, लखनऊ
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Lucknow News - -अयातुल्लाह खामेनेई की मौत पर तीन दिन के शोक की घोषणा -अजादारी रोड अयातुल्लाह खामेनेई

सभी केंद्र:: खामेनेई की मौत के बाद पुराने लखनऊ में उबाल

-तीन तक पर्यटकों के लिए इमामबाड़ा बन्द रखने की घोषणा लखनऊ, कार्यालय संवाददाता अयातुल्लाह खामेनेई की मौत को लेकर बड़ा विरोध प्रदर्शन देर शाम पुराने लखनऊ में देखने को मिला। छोटे इमामबाड़े पर बुलायी गई शोक सभा और कैंडल मार्च में हजारों लोग पहुंचे। मातम के बीच पुतले फूंके, नारे लगे और सभी की आंखें नम रहीं। रविवार को रोजा इफ्तार के बाद से ही छोटे इमामबाड़े पर भीड़ जुटने लगी। रात आठ बजते-बजते 20 से 25 हजार लोग छोटे इमामबाड़े आसपास इकट्ठा हो गए थे। अधिकांश लोगों के हाथों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह सैयद अली खामेनेई की फोटो थी और सभी उनके निधन से गम में थे।

मौलाना कल्बे जवाद, मौलाना यासूब अब्बास ने अयातुल्लाह सैयद अली खामेनेई की शहादत पर गम मनाने के साथ ही अमेरिका और इजरायल के रमजान के मौके पर ईरान पर हमले को कायराना हरकत बतायी। छोटे इमामबाड़े पर मजलिस होते-होते पूरी अजादारी रोड कर हजारों लोगों को हुजूम पहुंच चुका था। हाथों में मोमबत्ती जलाकर कैंडल मार्च निकाला गया। जगह-जगह अमेरिकी राष्ट्रपति और डोनाल्ड ट्रम्प और इजरायल के राष्ट्रपति नेतन्याहू का पुतला फूंका गया। सड़क पर जगह जगह इजरायल और अमेरिका के राष्ट्रपति के फोटो और झण्डे की फोटो पड़ी हुई थी। अजादारी स्ट्रीट पूरी तरह अयातुल्लाह खामेनेई के समर्थको से भर गई थी। यूनिटी कॉलेज की ओर से इमामबाड़े की ओर वाहनों का आवागमन रोक दिया गया था। शीर्ष शिया नेता की हत्या सुनियोजित साजिश: यासूब अब्बास ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की हत्या की कड़ी निंदा करते हुए इसे पूरी दुनिया के शिया मुसलमानों के लिए गहरा आघात बताया है। उन्होंने खामेनेई को शहीद करार देते हुए कहा कि यह घटना केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं, बल्कि इस्लामी दुनिया के नेतृत्व पर सीधा हमला है। मौलाना यासूब अब्बास ने आरोप लगाया कि आयतुल्लाह खामेनेई की शहादत में अमेरिका, इजराइल, सऊदी अरब की मिलीभगत है। मौलाना ने रमज़ान में ईरान पर हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि अमेरिका और इजराइल ने एक मुस्लिम देश पर हमला कर न केवल आयतुल्लाह खामेनेई की हत्या की, बल्कि सौ से अधिक निर्दोष स्कूली बच्चियों को भी मार डाला। उन्होंने इसे मानवता के खिलाफ अपराध बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। मौलाना ने विश्वास जताया कि ईरान इस संकट से और अधिक मजबूती के साथ उभरेगा। मौलाना यासूब अब्बास ने आयतुल्लाह खामेनेई की शहादत पर तीन दिन के शोक का आह्वान किया। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने घरों की छतों पर काले झंडे फहराएं और शोक के प्रतीक के रूप में काले कपड़े पहनें। पर्यटकों के लिए इमामबाड़ा बन्द रहेगा मौलाना यासूब अब्बास ने यह भी घोषणा की कि लखनऊ के ऐतिहासिक बड़ा इमामबाड़ा और छोटा इमामबाड़ा को अगले तीन दिनों तक पर्यटकों के लिए बंद रखा जाएगा। मौलाना ने कहा कि यह समय शोक और एकजुटता प्रदर्शित करने का है, ताकि दुनिया को यह संदेश दिया जा सके कि शिया समुदाय अपने नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़ा है। सड़को पर निकले बच्चे, महिलाएं और पुरुष रविवार को ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह सैयद अली खामेनेई के निधन की सूचना आते ही पुराने लखनऊ में उबाल आ गया। मौत की खबर आते हैं शिया समुदाय के लोग नारे लगाते हुए अजादारी रोड पर पहुंचने लगे। हाथों में सैयद अली खामेनेई की फोटो लिए लोग मातम मनाते नजर आए और आंखों में आंसू लेकर अमेरिका और इजरायल मुर्दाबाद के नारे लगाए। अयातुल्लाह खामेनेई की मौत की सूचना फैलते ही सैकड़ों की तादाद में लोग छोटे इमामबाड़े से लेकर बड़े इमामबाड़े तक एकत्रित हो गए। हर घर से निकलेगा खामेनेई, खामेनेई अमर रहे के नारे चारों तरफ गूंजने लगे। हुसैनाबाद के शाही गेट से लेकर बड़े इमामबाड़े तक सभी दुकानें पूरी तरह बंद रहीं, शटर नीचे गिरे हुए थे। मेडिकल स्टोर सहित आवश्यक सेवाओं की दुकानें भी बंद कर दी गईं। विरोध प्रदर्शन में महिलाएं, युवा और बच्चे भी शामिल हुए, जिनमें से कई ने काले झंडे, पोस्टर और खामेनेई की तस्वीरें हाथों में थामी हुई थीं। कुछ प्रदर्शनकारियों ने फूट-फूटकर रोते हुए ईरान के साथ एकजुटता जताई और इसे बड़ी साजिश करार दिया। बुर्का पहने महिलाएं हाथों में अयातुल्लाह खामेनेई का फोटो लिए मातम करती नजर आयीं। सभी की चेहरे गमजदा और आंखों में आंसू थे। लखनऊ, जो भारत का प्रमुख शिया केंद्र है, में यह प्रतिक्रिया इसलिए तेज रही क्योंकि यहां की शिया आबादी ईरान के धार्मिक नेतृत्व से गहरा जुड़ाव रखती है। परिवार की अभी तक कोई खबर नहीं मिली मौलाना गुलाम रजा की पूरी फैमिली ईरान में हैं। मौलाना गुलाम रजा मूल रूप से लखनऊ के हैं लेकिन पिछले 30 वर्षों से ईरान में निवास कर रहे हैं। उनकी बीवी, दो बेटियां और एक बेटा ईरान के कुम शहर में हैं। गुलाम रजा बीती दिसम्बर में ही ईरान से लखनऊ आए थे। उसक बाद से यहीं हैं। अब ईरान पर हमला होने के बाद से परेशान हैं। गुलाम रजा ने बताया कि शनिवार को परिवार से बात हुई थी। बेटिया स्कूल गई हुई थीं लेकिन उसके बाद इंटरनेट बंद होने से कोई सम्पर्क नहीं हो सका। मातम में बदल गई रमजान की रौनक लखनऊ में इन दिनों रमजान की रौनक देखी जा सकती थी। लेकिन ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद ये रौनक कम होती गई और ईरान के सुप्रीम लीडर सैयद अली खामेनेई की मौत के बाद रौनक रमजान की रौनक मातम में बदल गई। हुसैनबाद फूड स्ट्रीट पर रमजान के दिनों में हजारों लोग मौजूद होते हैं लेकिन उनके चेहरों पर खुशी होती है, रविवार को भी हजारों लोग मौजूद थे लेकिन उनके चेहरों पर अयातुल्लाह खामेनेई की मौत का गम दिख रहा था। आंसुओं के साथ लोग रो-रोक अयातुल्लाह खामेनेई को याद कर रहे थे और उनकी याद में मातम करते रहे। तीन दिन के शोक की घोषणा के फौरन बाद से हुसैनाबाद और चौक की सभी दुकाने बंद हो गई जो रमजान में पूरी रात भर खुला करती थीं। हुसैनाबाद फूट स्ट्रीट के साथ ही ही चौक, नक्कास, चौपट्टिया, बिल्लौजपुरा में भी खानपास से लेकर कपड़ो, मसालों व अन्य दुकाने बंद रहीं। मुख्यरूप से खानपान की दुकान रमजान में सुबह चार बजे तक खुलती है।

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