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किताबों की छपाई के टेंडर में लगाए गड़बड़ी के आरोप

- यूपी बेसिक एजुकेशन प्रिंटर्स एसोसिएशन ने कहा ब्लैक लिस्टेड कंपनी को दिया टेंडर- विभागों अफसरों ने मिल कर किया तीन सौ करोड़ का घोटालालखनऊ। निज संवाददाताबेसिक शिक्षा विभाग द्वारा बच्चों को दी जाने वाली किताबों की छपाई के लिए दिए गए 300 करोड़ के टेंडर में जमकर गड़बड़ी की गई है। इलाहाबाद के डीएम ने जिस मैसर्स बुरदा ड्रक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को ब्लैक लिस्ट करने की संस्तुती की थी। शासन के दबाव में उसी को छपाई का काम सौंप दिया गया। यह आरोप यूपी बेसिक एजुकेशन प्रिंटर्स एसोसिएशन ने गुरुवार को यूपी प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में लगाए।एसोसिएशन के अध्यक्ष शैलेंद्र जैन ने आरोप लगाया कि जिस बुर्दा ड्रक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को 300 करोड़ का टेंडर दिया गया, उसने पिछले साल किताबों की सप्लाई में देर लगाने के साथ ही घटिया गुणवत्ता वाले कागजों का इस्तेमाल भी किया था। इस जिक्र डीएम इलाहाबाद ने अपनी रिपोर्ट में भी की थी। वहीं बीते 9 मई को बेसिक शिक्षा निदेशक सर्वेंद्र विक्रम बहादुर सिंह ने भी इस कंपनी को टेंडर न देने की संस्तुति शासन से की थी। उनका कहना था कि कंपनी का रेट काफी अधिक होने की वजह से विभाग को करीब 55 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके बावजूद शासन ने इसी कंपनी से मोलभाव कर टेंडर देने को कहा। उच्च स्तरीय जांच की उठाई मांगप्रेसवार्ता में एसोसिएशन के पदाधिकारियों सुरेन्द्र सिंह व अतुल सिंह का कहना है कि कैग की रिपोर्ट में पिछले साल 97 लाख बच्चों को किताबें मिलने की बात सामने आई थी। उस समय भी टेंडर का 80 प्रतिशत काम इसी बुर्दा ड्रक कंपनी के पास था। उन्होंने सवाल उठाया कि जब विभाग ने किताबों का पूरा पैसा दिया तो सप्लाई पूरी क्यों नहीं की गई। उन्होंने मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

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