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5 मार्च, 2021|7:04|IST

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प्रेमचंद की कहानियों को जोड़ नाटक गढ़ने का यह पहला अनूठा प्रयोग

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-प्रेमचंद की 84वीं पुण्य तिथि की पूर्व संध्या पर पुस्तक का हुआ विमोचनलखनऊ। निज संवाददाताउपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की तीन कहानियों को जोड़कर पूर्णकालिक नाटक बनाने का यह पहला प्रयोग है जिसको पढ़ने का अलग ही अनुभव है। यह बातें वरिष्ट रंगकर्मी डॉ अनिल रस्तोगी ने बतौर मुख्य वक्ता कहीं। हजरतगंज स्थित प्रेस क्लब में सोमवार को सृजन शक्ति वेल्फेयर सोसाइटी की ओर से प्रसिद्ध कहानीकार मुंशी प्रेमचंद की 84वीं पुण्य तिथि कि पूर्व संध्या पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर केके अग्रवाल ने प्रेमचंद द्वारा रचित कहानियों पर आधारित नाटक जीवन यात्रा का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि आईपीएस महेन्द्र मोदी और विशिष्ट अतिथि डॉ उर्मिल कुमार थपलियाल मौजूद रहे। -किसान के संघर्ष को शब्दों में उकेराअपनी कृति के बारे में बताते हुए लेखक और वरिष्ठ रंगकर्मी केके अग्रवाल ने कहा कि 'जीवन यात्रा' के जरिए किसान के संघर्ष और उनके दर्दको शब्दों में पिरोकर बयां करने की कोशिश की है। इसमें प्रेमचंद की तीन कहानियों को मिलाकर एक नई कहानी गढ़ी गई है। कार्यक्रम में बतौर वक्ता शामिल हुए वरिष्ठ रंगकर्मी सूर्य मोहन कुलश्रेष्ठ ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद गरीबों, दलितों और किसानों के शोषण के खिलाफ निरंतर अपनी लेखनी चलाई। उनकी कहानियों से लोगों को प्रेरणा मिलती है। इसके बाद प्रो नलिन रंजन सिंह ने कहा कि संस्था ने प्रेमचंद के सबसे ज्यादा नाटक मंचित किए हैं। डॉ उर्मिल कुमार थपलियाल ने कहा कि पुस्तक के विमोचन से पहले इसका सफल मंचन किया गया जिससे साहित्य जगत को एक सशक्त नाटक मिला हुआ है। कार्यक्रम में हरीश बड़ोला, गोपाल सिंहा, प्रदीप श्रीवास्तव , आलोक श्रीवास्तव ,आकाश पांडे मौजूद रहे।-संस्था ने दी सच्ची श्रद्धांजलिमहासचिव डॉ सीमा मोदी ने कहा कि संस्था कि ओर से प्रकाशन से पहले कलाकारों द्वारा सफल मंचन कर उनको सच्ची श्रदांजलि दी है। इसके साथ ही अब तब राजधानी में प्रेमचंद पर आधारित नाटकों का सर्वाधिक मंचन संस्था की ओर से कराया गया है। जिसमें मुंशी प्रेमचंद की कहानियों में लांछन, बूढ़ी काकी, मंदिर,पंडित मोटेराम शास्त्री एवं सद्गति का मंचन किया गया जो दर्शकों द्वारा खूब सराहा गया है।