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भारत की नारियों में संस्कृति, संस्कार व संवेदना की ताकत है :डॉ चिन्मय पंड्या

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-महिला सम्मेलन एंव गायत्री दीप महायज्ञ का आयोजनलखनऊ। हिन्दुस्तान संवादभारत की नारियों में संस्कृति, संस्कार व संवेदना की ताकत है। अगर यह संवेदनाओं की ताकत जाग जाए तो यहां पर अंगुलमारो को भिक्षुक बनते, भटको को सही रास्ते पर आने और गिरे हुए को उठते देर नहीं लगेगी। यह बात देव संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार के प्रति कुलपति डॉ चिन्मय पांड्या ने कही। वह अखिल भारतीय परिवार शांति कुंज हरिद्वार के तत्वावधान में माधव सभागार, निरालानगर में महिला सम्मेलन एंव गायत्री दीप महायज्ञ में बोल रहे थे। इस मौके पर 2400 दीपों को प्रज्ज्वलित किया गया।डॉ पांड्या ने कहा कि इसी भूमि पर रानी लक्ष्मीबाई, रानी हाड़ा, अहिल्याबाई, गार्गी जैसी महिलान ने जन्म लिया, जिन्होंने अपने संवेदना की ताकत पर अमित छाप छोड़ी है। जहां संभावना, आत्मशक्ति, संकल्प है, वह भारत की नारी है। उन्होंने कहा कि आदमी भावनाओ की दृष्टि से शून्य होता जा रहा है। संवेदनाओं की दृष्टि से रिक्त होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि मानवीय जीवन का जितना ह्रास, पतन, अपमान, तिस्कार, उपेक्षा इस युग मे हुआ है, शायद ही किसी और युग मे हुआ हो। उन्होंने कहा कि मनुष्य का जीवन 84 लाख योनियों के बाद मिलता है, लेकिन लोग इसे व्यथ में गंवा दी रहे हैं। डॉ पांड्या ने कहा कि दीपक संकल्प की प्रेरणा देता है। बाहर के साथ आंतरिक अंधेरा भी दूर करता है। इससे पहले डॉ पंड्या का स्वागत किया गया। वही शांति टोली के गायकों ने 'ऐसी ज्योति जगदम्बे .. व मन का मैल..जैसे भजन सुनाए। इस मौके पर राम यश तिवारी, अयोध्या प्रसाद निगम, उमानन्द शर्मा, अरविंद निगम, अशोक द्विवेदी समेत बड़ी संख्या में पीत वस्त्रों में महिलाये व पुरुष मौजूद रहे।

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