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पॉवर कारपोरेशन को स्ट्रीट लाइट पर मीटर लगाना पड़ रहा महंगा

- प्रदेश भर में सभी स्ट्रीट लाइट मीटरिंग की योजना खासी महंगी पड़ रही

पॉवर कारपोरेशन की प्रदेश के सभी स्ट्रीट लाइटों में मीटर लगाने की योजना खासी महंगी साबित हो रही है। मीटर लगाने के बाद इनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी एक बड़ी समस्या बनने वाली है। इन सब को देखते हुए योजना में बदलाव की संभावना तलाश की जा रही है। कारपोरेशन के बड़े अधिकारी इसके प्रारूप में बदलाव कर सकते हैं।

स्ट्रीट लाइटों को मीटर से जोड़ने के लिए दो तरीके अपनाए जाने वाले थे। इनमें एक सीरिज में लगे खंभों में से किसी एक में मीटर लगाकर बिजली बिलिंग की जाए। इन खंभों को छोटे-छोटे मीटर सेग्मेंट में बांटने की योजना थी। इसके अलावा फीडर पर मीटर लगाकर बिलिंग करने की योजना है। हालांकि अब भी इसमें संशय बना हुआ है।

यह थी योजना

वास्तविक बिलिंग के लिए पॉवर कारपोरेशन ने सभी नगर निकायों में लगी स्ट्रीट लाइटों की पूरी मीटरिंग करने की योजना तैयार की थी। इस योजना में हर स्ट्रीट लाइट को मीटर से जोड़कर वास्तविक उपयोग तय कर उसके आधार पर बिलिंग की जानी प्रस्तावित है। हालांकि नगर निकायों की ओर से पहले ही सभी स्ट्रीट लाइटों की मीटरिंग को लेकर आपत्ति जताई जा चुकी है। निगमों ने इनकी देखरेख से भी पल्ला झाड़ लिया था।

यह है समस्या

इन मीटरों को लगाने में आने वाला खर्च बहुत अधिक होगा। इसके अलावा इनका रखरखाव भी खासा महंगा पड़ेगा। चोरी-टूटफूट से बचाने के लिए भी अतिरिक्त स्टाफ लगाना होगा। यह सब बेहद खर्चीला साबित होगा। आशंका जताई जा रही है कि देखरेख के अभाव में मीटर गायब हो जाएंगे और वर्तमान में जिस तरह अनुमानित आधार पर बिल चुकाते हैं वही व्यवस्था प्रचलन में आ जाएगी।

मीटर लगाने की योजना है। हम इसे लागू करेंगे। तकनीकी समस्याएं आने पर सुधार भी किया गया है।

आलोक कुमार, प्रमुख सचिव, ऊर्जा

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