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प्रदूषण नियंत्रण खस पौधा प्रौद्योगिकी से संभव : डॉ. लवानिया

- वनस्पति विज्ञान विभाग के कार्यक्रम का हुआ समापन

लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में प्रथम बार आयोजित हुई वनस्पति विज्ञान विभाग की कार्यशाला का मंगलवार को समपान हो गया। दूसरे दिन व्याख्यान श्रंखला में डॉ. यूसी लवानिया ने खस पौधा प्रौद्योगिकी से प्रदूषण का नियंत्रण करने सहायक बताते हुए एक जादुई पौधे की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि खस प्रौद्योगिकी में पर्यावरण समस्या जैसे मृदा स्वास्थ्य, जल प्रदूषण, वातावरण प्रदूषण और ओजोन जैसी परतों के लिए घातक घटक को अवशोषित करने की भरपूर क्षमता है, जिसके चलते इसका इस्तेमाल होना लाभकारी होगा। एनबीआरआई, लखनऊ के वैज्ञानिक डॉ. डीके उप्रेती ने लाइकेन की जैव विविधता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि लाइकेन वातावरण के बदलते परिवेश को परिवर्तित करने के लिए एक संकेतक पौधे के रूप में सहायक है।

व्याख्यान में पहुंचे डॉ. आरडी त्रिपाठी ने कहा कि पौध प्रौद्योगिकी से आर्सेनिक जैसे घाटक तत्वों का निवारण संभव है। वहीं, प्रो. आरआर राव ने व्याख्यान में बताया कि पौधों के नामकरण को आसानी से परिवर्तित नहीं किया जा सकता। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर वनस्पतियों के नामकरण का एक सर्वमान्य मानक है और अंतरराष्ट्रीय कोड के अनुरूप ही इसे परिवतिर्त किया जा सकता है, जबकि भारत में बहुत ही प्राचीन विधा होने के चलते पौधों की पहचान अंतरराष्ट्रीय कोड के नामकरण के अनुसार ही नहीं है। व्याखान के दूसरे दिन ही कार्यक्रम की समन्वयक प्रो. सेशू लवानिया ने वक्ताओं, शोधार्थियों, शिक्षाविदों तथा राष्ट्रीय अकादमी को धन्यवाद ज्ञापित किया।

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  • Web Title:Potable from Pollution Control Khas Plant Technology: Dr. Lavania
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