प्रतीक के फेफड़े में फंसा था खून का थक्का, सांस और दिल ने काम कर किया बंद

हिन्दुस्तान, लखनऊ
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प्रतीक यादव के पोस्टमार्टम में फेफड़े की मुख्य नस में खून का बड़ा थक्का फंसने की पुष्टि हुई। इससे उनकी सांस और दिल की कार्यप्रणाली बंद हुई। रिपोर्ट में शरीर पर छह चोटें मिलीं, जिनमें से तीन पुरानी थीं। चिकित्सक इसे गंभीर स्थिति मानते हैं।

प्रतीक के फेफड़े में फंसा था खून का थक्का, सांस और दिल ने काम कर किया बंद

प्रतीक यादव के पोस्टमार्टम में छह सदस्यीय विशेषज्ञों की टीम ने पाया कि मैसिव पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज्म यानी फेफड़े की मुख्य नस में खून का बड़ा थक्का फंस गया। इससे सांस और दिल की कार्यप्रणाली बंद होने से प्रतीक की सांसें थम गईं। चिकित्सा विज्ञान में इसे कार्डियोरेस्पिरेटरी कोलैप्स कहते हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक प्रतीक के शरीर पर छह चोटें थीं। चार चोटें दाएं हाथ पर कोहनी से कलाई तक थीं। एक चोट छाती के दाईं तरफ थी। एक चोट बाईं कलाई पर थी। सभी चोटें गिरने से लगने की आशंका है। कोई भी चोट ऐसी नहीं है, जिससे मौत हो सके। प्रतीक की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए वीडियोग्राफी के बीच कराए गए पोस्टमार्टम के दौरान विशेषज्ञों ने सभी पहलुओं को देखा। रिपोर्ट के मुताबिक फेफड़े की मुख्य नस में खून का बड़ा थक्का फंसने से प्रतीक की तबीयत अचानक बिगड़ी। दिल और सांस दोनों ने एक साथ काम करना बंद कर दिया, जिससे उनको मौका ही नहीं मिला और सांसें थम गईं। विस्तृत जांच के लिए आस-पास की कोशिकाओं को सुरक्षित रखा गया है, ताकि माइक्रोस्कोप से विस्तार से जांच की जा सके। सुरक्षित रखे गए विसरा से शरीर में दवा या रसायन का पता लगाया जाएगा.

शरीर पर कहां-कहां मिलीं चोटें

-पहली चोट छाती के सामने दाहिनी तरफ है। यह गहरी चोट थी, जिसका रंग बीच में लाल-भूरा और किनारों पर हरा-पीला बताया गया। चोट के नीचे खून जमने के निशान भी मिले।

-दूसरी चोट दाहिने हाथ के पीछे और अंदरूनी हिस्से में, बगल के नीचे पाई गई। इसमें भी लाल-भूरे और हरे-पीले रंग के निशान मिले।

-तीसरी चोट दाहिने फोरआर्म के अंदरूनी हिस्से में कोहनी से कलाई तक फैली हुई थी। इस चोट के नीचे भी रक्तस्राव के निशान मिले।

-चौथी चोट दाहिने फोरआर्म में कोहनी के पास थी।

-पांचवीं चोट दाहिनी कोहनी के पीछे बाहरी हिस्से में दर्ज की गई।

-छठी चोट बाएं हाथ की कलाई के ऊपरी हिस्से पर मिली।

पुरानी और नई चोटों का भी जिक्र

रिपोर्ट में डॉक्टरों ने चोटों के समय का भी अनुमान लगाया है। तीन चोटें पांच से सात दिन पुरानी हैं और तीन लगभग एक दिन पुरानी मानी गई हैं.

ये होता है पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज्म

आसान भाषा में समझें तो शरीर की किसी नस में खून का थक्का बन जाता है। यह थक्का खून के साथ बहकर फेफड़े तक पहुंच जाता है। वहां की मुख्य नस को बंद कर देता है। इससे फेफड़ों में खून और ऑक्सीजन का प्रवाह रुक जाता है। अचानक ऑक्सीजन न मिलने से दिल पर दबाव बढ़ता है। इससे कुछ ही मिनटों में मौत हो सकती है। डॉक्टर इसे बहुत गंभीर और जानलेवा स्थिति मानते हैं। प्रतीक में खून का थक्का पैर की नस से बनने की बात सामने आई है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रतीक यादव की मौत का कारण क्या था?
प्रतीक यादव की मौत का कारण मैसिव पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज्म था।
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