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ममता की छांव से दूर आंचल

लखनऊ। निज संवाददाता

जीपीओ स्थित बाल शिशु संरक्षण गृह जर्जर हालत में है। यहां रहने वाले मासूमों के लिए कोई खास इंतजाम नहीं है। मच्छर, चूहे और दरकी दीवारों के बीच मासूम रहने के लिए मजबूर हैं। कई बार शिकायत के बावजूद अधिकारियों ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया। हालांकि आल इंडिया पोस्टल इम्पलाइज यूनियन के पदाधिकारियों ने अपनी सात सूत्री मांगों में बाल शिशु संरक्षण की ओर ध्यान देने की बात रखी है।

डाक कर्मचारी शनिवार को अपनी मांगों को लेकर दूसरे दिन भी काला फीता बांधकर काम करते हुए नजर आए। कर्मचारियों का कहना है बाल शिशु संरक्षण गृह की जर्जर हालत के जिम्मेदार अधिकारी है।

नहीं आते है सफाई कर्मी

बाल शिशु संरक्षण में फिलवक्त चार मासूम रहते हैं। आस-पास गंदगी का ढेर लगा है। कुछ ही दूर पर सीवर से निकला मैला नालियों में बहता है। दुर्गन्ध के कारण कोई भी इस तरफ आने की हिम्मत नहीं जुटा पाता है। कर्मचारियों का कहना है पांच सौ स्टाफ में महज दो शौचालय बने हुए हैं। जिनकी सफाई के लिए कोई सफाईकर्मी तक नहीं है। सफाई के लिए निजी सफाई कर्मियों को बुलाना पड़ता है।

अव्यवस्था से घिरा हुआ है

कर्मचारियों का कहना है पानी की निकासी न होने के कारण बारिश में बाल शिशु संरक्षण गृह के चारों तरफ पानी भर जाता है। जिससे लोगों का गुजरना दूभर होता है। रसोईघर की हालत भी जर्जर है। यहां की अव्यवस्था देखते हुए अधिकतर कर्मचारियों ने बाल शिशु संरक्षण गृह में अपने बच्चों को रखने से इनकार कर दिया है।

वर्जन

ऐसा नहीं है, सफाई का खास ध्यान रखा जाता है। मच्छर और चूहे के लिए दवाओं का छिड़काव भी कराया गया है। इमारत काफी पुरानी है, जिसके कारण थोड़ी बहुत दिक्कत आती है। जल्द ही निस्तारण किया जाएगा।

योगेन्द्र मौर्या

चीफ पोस्ट मास्टर

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