सर्वे के लिए चयनित स्कूलों में झाड़ू तक नहीं लग रही
Lucknow News - लखनऊ में 40 सरकारी प्राइमरी स्कूलों का चयन स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए किया गया है, लेकिन यहां साफ-सफाई की स्थिति बेहद खराब है। कई स्कूलों में सफाई कर्मचारी नहीं हैं और शिक्षक बच्चों से सफाई करवा रहे हैं। स्वच्छता मूल्यांकन पांच बिंदुओं पर होगा, जिसमें परिसर की सफाई, कचरा प्रबंधन और शौचालयों की स्थिति शामिल हैं।

40 स्कूलों का चयन, फिर भी साफ-सफाई भगवान भरोसे कई जगह बच्चों से लगवाई जा रही झाड़ूस्वच्छता के पांच इंडिकेटर पर होना है स्कूलों में सफाई का मूल्यांकनलखनऊ। प्रमुख संवाददाताकेंद्र सरकार के स्वच्छता सर्वेक्षण में बेहतर रैंकिंग पाने की तैयारी कर रहे नगर निगम की जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आ रही है। सर्वेक्षण के लिए जिन सरकारी प्राइमरी स्कूलों का चयन किया गया है, वहां भी साफ-सफाई की स्थिति बेहद खराब है। कई स्कूलों में सफाई कर्मचारी तक नहीं पहुंच रहे और कहीं शिक्षक ही बच्चों से झाड़ू लगवाकर परिसर साफ कराने को मजबूर हैं।नगर निगम ने शहर के 40 सरकारी स्कूलों को स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए चुना है।
इन स्कूलों का निरीक्षण केंद्र सरकार की टीम द्वारा किया जाएगा और साफ-सफाई व स्वच्छता व्यवस्था के आधार पर अंक दिए जाएंगे। लेकिन निरीक्षण से पहले ही कई स्कूलों में गंदगी और अव्यवस्था सामने आने से तैयारियों पर सवाल उठने लगे हैं।बच्चों से कराई जा रही सफाईकई स्कूलों में नियमित सफाई व्यवस्था न होने के कारण शिक्षक खुद ही झाड़ू लगाते दिख रहे हैं। कुछ जगहों पर बच्चों से भी परिसर साफ कराया जा रहा है। अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों में सफाई के लिए पर्याप्त कर्मचारी नहीं हैं, जिससे बच्चों को भी इस काम में लगाया जा रहा है।पांच बिंदुओं पर होगा मूल्यांकनस्वच्छता सर्वेक्षण के तहत स्कूलों का आकलन पांच प्रमुख बिंदुओं पर किया जाएगा। इनमें परिसर की साफ-सफाई, कचरा प्रबंधन व्यवस्था, शौचालयों की स्थिति, स्वच्छता से जुड़ी व्यवहार परिवर्तन गतिविधियां और नियमित मॉनिटरिंग शामिल हैं। इन सभी बिंदुओं पर प्रत्यक्ष निरीक्षण, दस्तावेजी सत्यापन और नागरिक फीडबैक के आधार पर अंक दिए जाएंगे।कायाकल्प की तैयारी का दावानगर निगम का दावा है कि रैंकिंग शुरू होने से पहले चयनित स्कूलों में व्यवस्थाएं दुरुस्त करने का काम तेज कर दिया गया है। इसके तहत परिसर की सफाई, दीवारों की रंगाई-पुताई, डस्टबिन की व्यवस्था और कचरे के पृथक्करण के लिए अलग-अलग कंटेनर लगाए जा रहे हैं।नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि सभी चयनित विद्यालयों में बालक और बालिकाओं के लिए अलग-अलग, कार्यशील और स्वच्छ शौचालय सुनिश्चित किए जाएंगे। खराब पड़े शौचालयों की मरम्मत, पानी की उपलब्धता और वेंटिलेशन की व्यवस्था को प्राथमिकता दी जा रही है।स्कूलों में व्यवस्थाएं सुधारी जा रही हैं। शौचालय नए बनाए जा रहे हैं। सफाई व्यवस्था भी बेहतर होगी। इसे दिखवाया जाएगा।संजीव प्रधान, पर्यावरण अभियंता, नगर निगम
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