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छात्रों का भविष्य रामभरोसे, डेढ़ लाख पर महज तीन टीपीओ

टैग-पॉलीटेक्निक

लखनऊ। आशीष राजपूत

पॉलीटेक्निक में पढ़ने वाले डेढ़ लाख छात्रों को रोजगार से जोड़ना मुश्किल हो रहा है। प्रदेश भर में 160 राजकीय और अनुदानित संस्थान होने के बावजूद महज तीन संस्थानों में ही टीपीओ तैनात हैं। यह किसी मजाक से कम नहीं है कि पॉलीटेक्निक के तीन संस्थान छोड़कर किसी और संस्थान में टीपीओ ही नहीं है। यह छात्रों के भविष्य के साथ पूरी तरह से खिलवाड़ है।

प्रदेश भर में 141 राजकीय, 19 अनुदानित और 410 प्राइवेट संस्थान मौजूद हैं। इनमें लगभग 1.5 लाख छात्र पढ़ते हैं। राजकीय और अनुदानित संस्थानों को देखें तो हर साल करीब 37 हजार छात्र पास होकर निकलते हैं। इन छात्रों को रोजगार से जोड़ने के लिए संस्थानों में टीपीओ की तैनाती की जाती है, लेकिन पॉलीटेक्निक संस्थानों में टीपीओ के पद ही सृजित नहीं किये गए हैं।

दरअसल, पॉलीटेक्निक अपने संस्थानों में यह काम वहां पढ़ाने वाले शिक्षकों से करा रहा है। व्याख्याता शिक्षण कार्य के चलते छात्रों को रोजगार से जोड़ने पर खास ध्यान भी नहीं दे पा रहे हैं। इससे छात्रों का भविष्य अंधकार मय हो रहा है। वहीं, संस्थानों में शिक्षकों से टीपीओ का काम कराने से छात्रों को अच्छी कंपनियों का टोटा भी बना हुआ है।

इन तीन संस्थानों में टीपीओ तैनात

राजकीय पॉलीटेक्निक लखनऊ, राजकीय महिला पॉलीटेक्निक लखनऊ और राजकीय पॉलीटेक्निक कानपुर में टीपीओ के पद मौजूद है, जबकि अन्य संस्थान में पद ही सृजित नहीं हुए हैं।

रोजगार के नाम पर हो रही पैसे की बर्बादी

अभी हाल ही में पॉलीटेक्निक में छात्रों को रोजगार से जोड़ने के लिए एक-एक लाख रुपये दिये गए थे। ऐसे में यह प्रश्न खड़ा हो गया है कि जब तीन ही संस्थान में टीपीओ की तैनाती है तो व्याख्याताओं या प्रधानाचार्य को किस बात के लिए एक लाख रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई गई है? ऐसे में पैसे की बर्बादी होना निश्चित है।

आखिर किससे जुड़ेगा केंद्रीकृत प्लेसमेंट सेल

संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद जल्द ही केंद्रीकृत प्लेसमेंट सेल बनाने जा रहा है। इसको संस्थानों के प्लेसमेंट सेल से जोड़ा जाना है ताकि रोजगार पाने वाले छात्रों की निगरानी की जा सके। वहीं, प्रदेश भर में तीन ही टीपीओ है तो परिषद केंद्रीकृत प्लेसमेंट सेल किसके लिये बना रहा है?

वर्जन

यह शासन स्तर का मामला है। टीपीओ के पद शासन स्तर से सृजित होते हैं। फिलहाल, संस्थानों में शिक्षकों के जरिये यह काम कराया जा रहा है।

आरसी राजपूत, निदेशक, प्राविधिक शिक्षा।

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