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बढ़ते प्रदूषण पर महकमें बेपरवाह

388 माइक्रोग्राम प्रतिघन मीटर पहुंचा एक्यूआई

लखनऊ। प्रमुख संवाददाता

तापमान में गिरावट के साथ बढ़ते प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए संबंधित विभाग मौन बैठे हैं। न कोई सख्ती और न कोई धरपकड़। निर्माण कार्य व कूड़े का जलना भी धड़ल्ले से जारी है। दिवाली पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी जमकर उल्लंघन हुआ। इसी का नतीजा है कि आसमान में छाई धुंध कम नहीं हो रही है। एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) खतरनाक स्थिति में पहुंच रही है। शनिवार को एक्यूआई 388 माइक्रोग्राम प्रतिघन मीटर रिकार्ड की गई।

गत दिनों प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने विभागों के साथ बैठक कर कार्ययोजना सौंपी थी। प्रदूषण के कारकों को चिह्नित कर उसपर नियंत्रण करने के लिए 15 अक्टूबर तक का समय निर्धारित किया गया था। जिलाधिकारी ने भी विभागों को कार्ययोजना पर काम करते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को रिपोर्ट सौंपने व उसे वेबसाइट पर अपलोड करने का निर्देश दिया था लेकिन हुआ कुछ नहीं। सिर्फ कुछ सड़कों की मरम्मत हो सकी है। कूड़े का जलना, खुले में निर्माण कार्य होना, जाम की समस्या आदि यथावत है।

देश का 7वां प्रदूषित शहर है लखनऊ

शनिवार को लखनऊ देश का सातवां प्रदूषित शहर रहा। यहां पर एक्यूआई 388 माइक्रोग्राम रिकार्ड की गई। अभी यह बहुत खराब स्थिति में है। लेकिन महज 12 माइक्रोग्राम बढ़ने पर यहां की हवा खतरनाक स्थिति में पहुंच जाएगी। जिस तेजी से प्रदूषण बढ़ रहा है उससे हवा की गुणवत्ता खतरानक स्थिति में पहुंचने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। एनसीआर के जिलों में हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्थिति में पहुंच चुकी है। पहले नम्बर पर फरीदाबाद (440), दूसरे पर ग्रेटर नोएडा (420) व तीसरे नम्बर पर बुलंदशहर (415) जिला रहा।

पिछले वर्ष हुआ था छिड़काव

पिछले वर्ष देश का सबसे प्रदूषित शहर होने पर लखनऊ में नगर निगम को सड़कों पर व फायर बिग्रेड के पेड़ों पर छिड़काव कराना पड़ा था। गत वर्ष शहर में एक्यूआई 485 माइक्रोग्राम पहुंच गया था। नगर निगम ने जोन वार कार्ययोजना बनाकर छिड़काव शुरू कराया था। इस वर्ष छिड़काव की अभी कोई कार्ययोजना नही बनाई गई है।

मेट्रो को भेजी नोटिस

प्रदूषण को बढ़ाने में लखनऊ मेट्रो रेल कारपोरेशन (एलएमआरसी) को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नोटिस भेजी है। फैजाबाद रोड पर लगभग चार किलोमीटर की दूरी पर निर्माण सामग्री बिखरी पड़ी है। वाहनों के आवागमन से धूल उड़ रही है। निर्माण सामग्री न ढकने व सड़क पर छिड़काव न करने पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सख्त कम उठाते हुए नोटिस भेजी है। यथाशीघ्र निर्माण सामग्री को ढकने का निर्देश दिया है।

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लखनऊ के साथ कानपुर, आगरा, वाराणसी व मुरादाबाद में मुख्य सचिव से अनुमोदित कार्ययोजना बनाकर विभागों को दे दी गई है। लखनऊ के अधिकारियों के साथ बैठक भी हो चुकी है। कार्ययोजना उन्हीं को लागू करना है। कुछ विभागों ने काम शुरू किया है लेकिन अभी इसमें तेजी लाने की जरूरत है। कुछ जरूरी विभागों के साथ एक बार फिर बैठक कर प्रदूषण को रोकने के लिए एक बार फिर रणनीति बनाई जाएगी।

आशीष तिवारी, सचिव, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।

एक्यूआई का मानक

50 माइक्रोग्राम तक हवा की गुणवत्ता बहुत अच्छी होती है।

50 से 100 के बीच हवा की गुणवत्ता संतोषजनक होती है।

100 से 200 के बीच हवा की गुणवत्ता मध्यम वर्ग की हवा होती है

200 से 300 के बीच हवा की गुणवत्ता खराब हो जाती है।

300 से 400 के बीच हवा की गुणवत्ता बहुत खराब हो जाती है।

400 से ऊपर होने पर हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्थिति में पहुंच जाती है।

शहरों में एक्यूआई की स्थिति (माइक्रोग्राम प्रतिघन मीटर में)

शहर एक्यूआई

फरीदाबाद 440

ग्रेटर नोएडा 420

बुलंदशहर 415

गाजियाबाद 403

दिल्ली 401

भिवाड़ी 390

लखनऊ 388

वाराणसी 368

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