
खतरनाक स्तर पर राजधानी का प्रदूषण, सफाई कंपनियां कचरा जलाकर बढ़ा रहीं संकट
Lucknow News - राजधानी में प्रदूषण स्तर खतरनाक हो गया है। कूड़ा उठाने वाली कंपनियां कचरा जलाकर नगर निगम को धोखा दे रही हैं। नगर निगम केवल जुर्माना लगाकर अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है। हाल ही में, सफाई एजेंसियों पर 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया, लेकिन सुधार नहीं हुआ। प्रदूषण बढ़ता जा रहा है, और…
लखनऊ में प्रदूषण का स्तर खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। शहर की हवा जहरीली होती जा रही है लेकिन फिर भी कूड़ा उठाने वाली कंपनियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। जिम्मेदार कंपनियां रोजाना खुलेआम कचरा जला रही हैं और नगर निगम सिर्फ जुर्माने का डंडा दिखाकर अपनी औपचारिकता पूरी कर रहा है। बुधवार को नगर निगम ने ऐसी ही कूड़ा जलाने की घटनाओं पर सफाई एजेंसियों पर मात्र 20,000 का जुर्माना लगाया था।
इससे पहले भी 5-6 बार इन्हीं कंपनियों को कूड़ा जलाते हुए पकड़कर जुर्माना ठोका गया, लेकिन सुधार? शून्य! गुरुवार को फिर वही शर्मनाक हरकत हुई है। बता दें कि विवेकानंद अस्पताल और आशियाना के पास बड़े पैमाने पर कूड़ा जलता पाया गया। धुआं आसमान में फैलता रहा और नगर निगम फिर जुर्माना-खेल खेलने के अलावा कुछ न कर पाया।
कंपनियां, ठेकेदार कर्मचारी से खुद जलवा रहे कचरा
इन सफाई एजेंसियों के कर्मचारी ही खुद कचरा इकट्ठा कर जलाते हैं। क्योंकि ठेकेदार और कंपनियां इन्हें जलाने के लिए कह रहे हैं। जलने से उन्हें कूड़ा नहीं उठाना पड़ता है। उनका कूड़ा उठाने का पैसा बचता है। कूड़ा उठाने में समय और मेहनत लगती है। लखनऊ का एक्यूआई रोज खतरनाक स्तर पार कर रहा है, तब भी नगर निगम की आंखें बंद है। प्रदूषण के दौरान जहां सरकार को कड़ाई करनी चाहिए, वहीं नगर निगम के ठेकेदार धड़ल्ले से कचरा जला रहे हैं। पर्यावरण अभियंता संजीव प्रधान का कहना है कि पकड़े जाने पर कार्रवाई की जा रही है और जुर्माना लगाया जा रहा है।

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