DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

प्रतिष्ठा और अपेक्षाओं की दोहरी जिम्मेदारी से जूझ रहे सियासी सूरमा

reputation  expectancy  responsibility

1 / 6प्रतिष्ठा और अपेक्षाओं की दोहरी जिम्मेदारी से जूझ रहे सियासी सूरमा

 reputation  expectancy  responsibility

2 / 6प्रतिष्ठा और अपेक्षाओं की दोहरी जिम्मेदारी से जूझ रहे सियासी सूरमा

 reputation  expectancy  responsibility

3 / 6प्रतिष्ठा और अपेक्षाओं की दोहरी जिम्मेदारी से जूझ रहे सियासी सूरमा

 reputation  expectancy  responsibility

4 / 6प्रतिष्ठा और अपेक्षाओं की दोहरी जिम्मेदारी से जूझ रहे सियासी सूरमा

 reputation  expectancy  responsibility

5 / 6प्रतिष्ठा और अपेक्षाओं की दोहरी जिम्मेदारी से जूझ रहे सियासी सूरमा

 reputation  expectancy  responsibility

6 / 6प्रतिष्ठा और अपेक्षाओं की दोहरी जिम्मेदारी से जूझ रहे सियासी सूरमा

PreviousNext

दोहरी जिम्मेदारी हो तो जवाबदेही भी उतनी ही हो जाती है। खुद की प्रतिष्ठा अलग से दांव पर होती है। लोगों की अपेक्षाएं भी खूब बढ़ जाती हैं। चुनावी माहौल में अब उन पर भी चर्चा हो जाए जो इसी तरह की  दोहरी जिम्मेदारी का बोझ उठाये हुए हैं। इन बड़ी शख्सियतों में कई अपनी अपनी पार्टी की कमान संभाले हुए हैं तो कई प्रदेश यूनिट के अध्यक्ष हैं। इन पर प्रचार से लेकर रणनीति बनाने व विरोधियों से जूझने तक की जिम्मेदारी है पर मुश्किल यह कि खुद भी चुनाव लड़ रहे हैं। अपने से लेकर अपनों तक की चिंता खुद ही करनी है। 
ऐसी चुनौतियों से विभिन्न दलों के  प्रदेश अध्यक्ष भी जूझ रहे हैं। आइए यूपी में बन रहे इस दिलचस्प सियासी नजारे पर नजर डालते हैं। 

राहुल गांधी
देश की सबसे पुरानी पार्टी को सत्ता में लाने की उनकी जिम्मेदारी इसलिए भी है क्योंकि वह इसके अध्यक्ष हैं। देश भर में प्रत्याशियों के लिए रैलियां करने के अलावा उन्हें अमेठी के साथ वायनाड पर भी ध्यान देना है। वह दोनों जगह से चुनाव लड़ रहे हैं। वह प्रधानमंत्री पद के लिए कांग्रेस की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुकाबले चेहरा हैं। 

अखिलेश यादव
समाजवादी पार्टी की कमान संभाले हुए अखिलेश यादव तो  पहले तो बसपा के साथ गठबंधन को मूर्त रूप देने में लगे रहे। इसके बाद सीटों के बंटवारे, प्रत्याशियों का चयन, संयुक्त रैलियां जैसे बड़े कामों से जूझते रहे। उनके सामने सपा व बसपा के प्रत्याशियों को जिताने की भी जिम्मेदारी है। साथ ही परिवार के सदस्यों की जीत सुनिश्चित करने का भी जिम्मा है। 

राज बब्बर
राजबब्बर के हाथों यूपी कांग्रेस की कमान हैं। इसके अलावा वह फतेहपुर सीकरी से चुनाव लड़ रहे हैं। काफी समय से प्रत्याशियों के नाम तय करने, दूसरे दलों से मजबूत नेताओं को लाने और गठबंधन की संभावनाएं तलाशने जैसे कामों में उन्होंने पार्टी के केंद्रीय नेताओं की खासी मदद की। अब उन्हें अपनी और पार्टी की प्रतिष्ठा बचानी है।

आर एस कुशवाहा
बसपा के प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते श्री कुशवाहा पर संगठनात्मक जिम्मेदारी तो है ही, सपा के साथ तालमेल बिठाने, दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कराने व मायावती के निर्देशों का पालन करवाने की जिम्मेदारी उनकी है। वह सलेमपुर से लोकसभा चुनाव भी लड़ रहे हैं। प्रदेश अध्यक्षी के दायित्व के साथ सलेमपुर में विरोधियों को शिकस्त देने की जिम्मेदारी है। 

अजित सिंह
राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष अजित सिंह के सामने खुद के साथ बेटे जयंत चौधरी को जिताने की चुनौती है। उनका तीसरा प्रत्याशी मथुरा से चुनाव मैदान में है। रालोद ने तीनों सीटों पर गठबंधन से समझौता किया है। मुजफ्फरनगर और बागपत में चुनाव भी हो गया है। अपनी सीट के साथ तीसरे प्रत्याशी को जिताना अब उनकी प्राथमिकता है।

शिवपाल यादव
अपना पूरा सियासी सफर सपा में गुजारने वाले शिवपाल यादव के सामने कई जिम्मेदारी हैं। कम वक्त में बनाई नई पार्टी को सीट व वोटों की शक्ल में मजबूती दिलाना। फिरोजाबाद में अपनी सीट को जीतना। साथ ही यादव वोट बैंक में अपनी पकड़ साबित करना। उनके पास वैसे खोने के लिए कुछ नहीं लेकिन जो पाएंगे वह सपा की कीमत पर होगा और यही उनकी ताकत होगी। 

अनुप्रिया पटेल  
संरक्षिका, अपना दल सोनेलाल , प्रत्याशी मिर्जापुर केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल को एक ओर अपना दल के दूसरे गुटों और परिवार के अपनों से जूझना पड़ रहा है तो दूसरी ओर उन्हें भाजपा से बेहतर तालमेल रखने हुए ज्यादा से ज्यादा पार्टी को खुद को ज्यादा से ज्यादा मजबूती देने का जिम्मा भी है। उनकी पार्टी के एक प्रत्याशी भाईलाल  कोल राबर्ट्सगंज से लड़ रहे हैं तो खुद अपनी सीट मिर्जापुर से चुनाव लड़ रही हैं। 

महेंद्र नाथ पांडेय
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष, प्रत्याशी चंदौली 
वह भाजपा के सांसद तो पहले से ही थे लेकिन पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद उनकी जिम्मेदारी और बढ़ गई है। सरकार व संगठन के बीच तालमेल बनाने की काम वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ करते हैं। चंदौली से दुबारा जीतने के लिए भी उन्हें वक्त निकालना है।  

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Political tragedy of dual responsibility of prestige and expectations