महापौर के बयान पर अखिलेश यादव का पलटवार
राजधानी में ‘नारी सम्मान’ को लेकर महापौर सुषमा खर्कवाल और सपा मुखिया अखिलेश यादव के बीच जुबानी जंग चल रही है। अखिलेश ने महापौर के बयान को निंदनीय बताया और कहा कि किसी की मां का अपमान स्वीकार्य नहीं है। महापौर ने अपने बयान का बचाव करते हुए कहा कि उनका इशारा सभी महिलाओं के सम्मान की ओर था।

राजधानी की राजनीति में ‘नारी सम्मान’ को लेकर जुबानी जंग तेज हो गई है। महापौर सुषमा खर्कवाल के बयान पर सपा मुखिया अखिलेश यादव ने करारा जवाब देते हुए इसे निंदनीय और द्वेषपूर्ण करार दिया है। दोनों नेताओं के बीच यह टकराव अब व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर राजनीतिक मर्यादा और नैतिकता की बहस में बदलता दिख रहा है। सभी मांओं, बहन व बेटियों की बात की थी : महापौरमहापौर सुषमा खर्कवाल ने अपने बयान में कहा था कि जिस मां ने जन्म दिया, बहन की उंगली पकड़कर चलना सीखा और बेटी का चेहरा देखकर थकान उतरती है, उनका सम्मान नहीं किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव ने उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया और आधी आबादी के सम्मान को नजरअंदाज किया। हालांकि विवाद बढ़ने पर महापौर ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने किसी व्यक्ति विशेष या किसी की मां का नाम नहीं लिया, बल्कि देश की सभी महिलाओं के सम्मान की बात की थी। सभी मांओं, बहन व बेटियों की बात की थी।किसी की मां का अपमान स्वीकार्य नहीं : अखिलेशइस बयान के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सीधा हमला बोलते हुए कहा कि राजनीतिक मजबूरी में मेरी दिवंगत मां का नाम लेकर एक महिला द्वारा दूसरी महिला का अपमान करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने महापौर को नसीहत दी कि वे अपने घर के बुजुर्गों और बच्चों से पूछें कि ऐसा बयान उचित है या नहीं। अखिलेश ने इसे भारतीय समाज की मर्यादा के खिलाफ बताते हुए कहा कि किसी की मां का अपमान कभी स्वीकार्य नहीं हो सकता। अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि राजनीतिक भविष्य उज्ज्वल हो सकता था, अगर नैतिक स्तर इतना नीचे न गिराया जाता। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इस बयान से महापौर के समर्थक भी शर्मिंदा हैं। वहीं भाजपा खेमे में इसे सपा की राजनीतिक संवेदनशीलता का नाटक बताया जा रहा है।
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