
बांग्लादेशी सफाईकर्मियों की जांच दो विभागों के बीच फंसी
Lucknow News - पुलिस लिख रही नगर निगम को पत्र नगर निगम ने पुलिस पर डाला जिम्मा लखनऊ।
पुलिस लिख रही नगर निगम को पत्र नगर निगम ने पुलिस पर डाला जिम्मा लखनऊ। प्रमुख संवाददाता शहर में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों की पहचान का मुद्दा अब सरकारी विभागों के बीच ‘लेटर वॉर’ में तब्दील हो गया है। हजारों की संख्या में बांग्लादेशियों के सफाईकर्मी बनकर शहर में घुलने-मिलने की खबरों ने हड़कंप मचा रखा है, लेकिन जांच के नाम पर जिम्मेदारी एक-दूसरे के पाले में डाली जा रही है। हालत यह है कि संयुक्त पुलिस आयुक्त जहां नगर निगम को पत्र लिखकर कड़ा रुख अपना रहे हैं, वहीं नगर निगम के अधिकारी पुलिस सत्यापन के बिना हाथ खड़े कर रहे हैं।
तीन रिमाइंडर के बाद भी नहीं जागे संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) बबलू कुमार ने नगर आयुक्त को एक कड़ा पत्र भेजा है। पुलिस की ओर से 21 नवंबर 2025 से लेकर अब तक तीन रिमाइंडर भेजे जा चुके हैं, लेकिन नगर निगम की ओर से अब तक कोई ठोस जांच रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई है। संयुक्त पुलिस आयुक्त ने अपने पत्र में हिंदुस्तान में छपी खबर ‘लखनऊ में सफाईकर्मी बना दिए गए हजारों बांग्लादेशी’ का भी उल्लेख किया है। सुरक्षा के लिहाज से इसे बेहद संवेदनशील बताया है। नगर निगम का पलटवार, पुलिस ही करे सत्यापन दूसरी ओर, नगर निगम के नगर स्वास्थ्य अधिकारी पीके श्रीवास्तव ने संयुक्त पुलिस आयुक्त को पत्र लिखकर अपनी मजबूरियां गिनाई हैं। नगर निगम का तर्क है कि उनके पास किसी व्यक्ति की राष्ट्रीयता जांचने का कोई तंत्र नहीं है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि जोन-1, 3, 4, 6 और 7 में तैनात सफाईकर्मियों के पुलिस सत्यापन के निर्देश तो दिए गए हैं, लेकिन यह प्रक्रिया पुलिस के सहयोग के बिना अधूरी है। नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने लिखा है कि संबंधित थानाध्यक्षों और सहायक पुलिस आयुक्तों को निर्देशित किया जाए कि वे जोनल सेनेटरी अधिकारियों के साथ समन्वय करें और सत्यापन कार्य को पूरा करें। संयुक्त पुलिस आयुक्त बबलू कुमार ने अपने ताजा पत्र में जल्द से जल्द जांच आख्या उपलब्ध कराने की अपेक्षा की है। वहीं, नगर निगम ने सारा दारोमदार अब क्षेत्रीय पुलिस की सक्रियता पर डाल दिया है। फिलहाल, 6 जनवरी और 9 जनवरी के इन पत्रों ने यह साफ कर दिया है कि लखनऊ में अवैध प्रवासियों का मुद्दा फाइलों में तो घूम रहा है, लेकिन जमीन पर काम होना अभी बाकी है।

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