Poet - कवि सम्मेलन व मुशायरा: ..तेरा ख्याल दिल से निकलता नहीं कभी DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

कवि सम्मेलन व मुशायरा: ..तेरा ख्याल दिल से निकलता नहीं कभी

Poet, conference, care, heart, emanate, ever

राष्ट्रीय शोषित बेदार समिति के तत्वावधान में अशरफपुर किछौछा स्थित माली चौराहे पर मुशायरा एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। मौलाना मोहम्मद रफीक अंजुम किछौछवी के संरक्षण एवं असलम खान फैजाबादी के संचालन में हुए कार्यक्रम का उद्घाटन रिटायर्ड जज जौनपुर अनुपत राम यादव ने किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मोहम्मद आदिल किछौछवी के नाते पाक से हुआ। बेदार समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहम्मद सिद्दीक ने कहा कि देश को आजाद कराने में उर्दू भाषा ने विशेष योगदान दिया है। सितारे उर्दू एवार्ड से सम्मानित मोहम्मद शफी नेशनल इंटर कालेज हंसवर के शिक्षक मोहम्मद असलम खान ने कहा कि उर्दू दुनिया की सबसे मीठी जुबान है। यह भाषा विभिन्न प्रकार के फूलों का एक ऐसा गुलदस्ता है जिसकी खुशबू से पूरा देश महकता रहता है। 
उर्दू किसी एक जाति धर्म या संप्रदाय की भाषा नहीं बल्कि सभी भारतीयों की भाषा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अनुपत राम यादव ने कहा कि शायर एवं कवि अपनी रचनाओं के माध्यम से देश भक्ति एवं सांप्रदायिक सद्भाव की भावना को मजबूत करते हैं। 
मुशायरे के संयोजक धर्मशील ने कहा कि भारतीय भाषाओं के उत्थान से ही भारत की तरक्की संभव है। मुशायरा रात भर बड़ी कामयाबी के साथ चलता रहा। शायरों एवं कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। फलक सुल्तानपुरी ने अपने महबूब की जुदाई का इजहार कुछ इस तरह पेश किया, करती हूं लाख कोशिशें पर उसके बावजूद, तेरा ख्याल दिल से निकलता नहीं कभी। 
लखनऊ से आए अशअर अलीग ने अपनी खुशी इस तरह जाहिर की, भला खुशियों को कैसे रोक रखें, हमारे घर में दरवाजा नहीं है। हास्य व्यंग्य के शायर हलचल टाण्डवी ने लोगों को खूब हंसाया, नकाब अब ऐसा चला कसा कसा, बताओ यह किसने सिला। इरम सुल्तानपुरी ने फूलों का महत्व इस तरह बताया, गुल अगर नहीं होते तितलियां नहीं होती, जिंदगी के गुलशन में शोखियां नहीं होती। शायर मोहम्मद इजहार मुकद्दर किछौछवी ने उर्दू से इस तरह मोहब्बत पेश की, तू अगर चाहे अगर समझे अगर तू बोले, हर बशर छोटा-बड़ा आज से उर्दू बोले। हसन वारसी किछौछवी ने घमंड से दूर रहने की नसीहत देते हुए कहा कि जो अपनी नस्लों नसब पर बहुत हैं इतराते, उन्हें बिलाल और काबा दिखा दिया जाए। दिलकश सुल्तानपुरी ने अपनी देशभक्ति कुछ इस तरह पेश की, मुल्क को जब भी पढ़ा वक्त लहू हमने दिया है, हम कहां से तुम्हें गद्दार नजर आते हैं। कुमैल जलालपुरी ने आज की राजनीति पर कहा, जिन्हें लेना था बोसा मंदिरों का, वही सब आज कुर्सी चूमते हैं। इसके अतिरिक्त  समी अहमद किछौछवी, कदीर अंजुम किछौछवी, शारदा देवी कवयित्री, अहवारुल हक, आदिल किछौछवी, रजिया सुल्तान आजमगढ़, अब्दुल अव्वल आजमी व अन्य शायर एवं कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। इस मौके पर रामानंद निषाद, डा. एस अकमल, लल्लू खादिम, अब्दुल रब, फूलचंद निषाद, डा. अतीकुरहमान, मोहम्मद नफीस सभासद, जियालाल, मोहम्मद सिद्दीक, धर्मशील, फारुक अहमद व अन्य मौजूद रहे।

  

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Poet