हत्या हरण सरोवर: अनजाने पापों से मुक्ति दिलाने वाला विजेथुआ का पवित्र तीर्थ
सुलतानपुर के विजेथुआ महावीर धाम स्थित हत्या हरण सरोवर में पापांकुश एकादशी पर ही चमत्कारी रूप से जल प्रकट होता है, जिसमें स्नान करने से अनजाने में हुई
शीलेश बरनवाल, सुलतानपुर। उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर जिले के सूरापुर क्षेत्र में एक ऐसा पवित्र स्थल विद्यमान है, जो सदियों से श्रद्धालुओं की आस्था का अटूट केंद्र बना हुआ है। यह स्थान है पौराणिक कालिनेमि वध स्थल विजेथुआ महावीर धाम। यहाँ स्थित हत्या हरण सरोवर की महिमा इतनी अपार है कि दूर-दूर से श्रद्धालु यहाँ पहुँचते हैं और इस सरोवर में डुबकी लगाकर अपने अनजाने पापों से मुक्ति की कामना करते हैं। एक अद्भुत सरोवर जो साल में एक बार भरता है
सरोवर का रहस्य
विजेथुआ महावीर धाम के मुख्य मंदिर के ठीक दक्षिण दिशा में स्थित यह हत्या हरण सरोवर अपने आप में एक अलौकिक रहस्य समेटे हुए है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस सरोवर में स्नान करने से मनुष्य को उन पापों से मुक्ति मिलती है जो उसने जीवन में अकारण या अनजाने में किसी जीव की हत्या करके अर्जित किए हों। साधारण जीवन में अनेक बार ऐसा होता है कि खेत जोतते समय, मार्ग चलते समय या दैनिक कार्यों के दौरान अनजाने में जीव हत्या हो जाती है। ऐसे पापों के प्रायश्चित का यह सरोवर एकमात्र और सिद्ध स्थान माना जाता है।
जल की विशेषता
इस सरोवर की सबसे विस्मयकारी विशेषता यह है कि वर्ष के 364 दिन इसमें जल का एक कतरा भी नहीं ठहरता। केवल पापांकुश एकादशी के पावन अवसर पर ही इस सरोवर में जल प्रकट होता है और उसी दिन स्नान का विशेष महत्व माना जाता है। यह घटना स्थानीय लोगों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है।
प्रशासनिक प्रयास और विफलता
बार-बार हुए प्रयास, बार-बार मिली विफलता। इस सरोवर को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी कई प्रयास हुए हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और शासन के अधिकारियों ने समय-समय पर इस सरोवर को स्थायी रूप से जलमय करने की कोशिश की। आधुनिक संसाधनों और सरकारी तंत्र की सहायता से जल भरने के प्रयास किए गए, परंतु हर बार परिणाम शून्य ही रहा। जल या तो टिकता ही नहीं या असमय सूख जाता है। ग्रामीण इसे ईश्वरीय संकेत मानते हैं और कहते हैं कि इस सरोवर का स्वभाव मनुष्य के वश में नहीं है।
संत का रहस्योद्घाटन
काशी के संत ने खोला रहस्य। हत्या हरण सरोवर के इस रहस्य पर हरिश्चंद्र घाट काशी के प्रसिद्ध अवधूत उग्र चण्डेश्वर कपाली महाराज ने प्रकाश डाला है। वे बताते हैं कि यह सरोवर कोई साधारण जलाशय नहीं है, बल्कि यह एक दिव्य और सिद्ध तीर्थ है। उनके अनुसार जिस दिन इस सरोवर में हत्याजनित पापों को हरने की आध्यात्मिक क्षमता जागृत होती है, उसी दिन इसमें जल स्वतः प्रकट हो जाता है। शेष दिनों में इसका सूखा रहना इस बात का प्रमाण है कि उन दिनों इसमें वह शक्ति सक्रिय नहीं होती। यह पावन अवसर केवल पापांकुश एकादशी को ही प्राप्त होता है। इसीलिए उस दिन यहाँ स्नान का असाधारण महत्व है।
रामचरित मानस में उल्लेख
रामचरित मानस में भी है इस धाम का उल्लेख। विजेथुआ महावीर धाम की पौराणिक महत्ता केवल स्थानीय किंवदंतियों तक सीमित नहीं है। गोस्वामी तुलसीदास रचित रामचरित मानस में भी इस कालिनेमि वध स्थल का उल्लेख मिलता है, जो इस तीर्थ की प्राचीनता को प्रमाणित करता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इसी स्थान पर भगवान हनुमान ने छद्म वेश में आए राक्षस कालिनेमि का वध किया था। उस वध से उत्पन्न पाप के प्रायश्चित हेतु ही इस सरोवर का निर्माण हुआ, ऐसी धारणा प्रचलित है। यह धाम आज भी आस्था, इतिहास और आध्यात्मक चेतना का एक जीवंत संगम है। पापांकुश एकादशी के अवसर पर यहाँ दूर-दूर से श्रद्धालु उमड़ते हैं और हत्या हरण सरोवर में स्नान कर जीवन की अनजानी भूलों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं।
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