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पत्रकारिता दिवस

हीन भावना से बाहर आएं हिन्दी पत्रकार: हृदयनारायण

-उप्र हिन्दी संस्थान में हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर समारोह

-विधानसभा अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित को पत्रकारिता में योगदान के लिए दिया गया 'बाबूराव विष्णु पराड़कर पत्रकारिता शिखर सम्मान'

लखनऊ। वरिष्ठ संवाददाता

ऐसा क्या है कि अंग्रेजी में 'गुड मॉर्निंग' बोलें तो अच्छा लगता है और हिन्दी का 'सुप्रभात' समझ में नहीं आता। अंग्रेजी में कुछ कहा जाए तो सुनने वाला जाग जाता है, और हिन्दी में सुस्ती छाई रहती है। पत्रकार भी इसी भावना से ग्रसित हैं जबकि यह सिरे से गलत है। भारतीय हिन्दी पत्रकारिता बाकी दुनिया से बेहतर है और हिन्दी के पत्रकार इस हीन भावना से बाहर आकर काम करें तो बेहतर होगा।

यह कहना था लेखक, विचारक, स्तम्भकार और विधानसभा अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्ष्रित का। वह हिन्दी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर उप्र हिन्दी संस्थान में आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने यहां यह भी कहा कि अपयश की चर्चा बहुत दिनों तक होती है इसलिए श्रीकृष्ण ने अर्जुन से भी यही कहा था कि यश बहुत जरूरी है। पत्रकारों को समाज में वह सम्मानित स्थान प्राप्त है जिसे देखकर अन्य क्षेत्र के लोगों को ईर्ष्या होती है। इस समारोह में हृदयनारायण को अखिल भारतीय हिन्दी पत्रकार संघ और रंगभारती की ओर से पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए 'बाबूराव विष्णु पराड़कर पत्रकारिता शिखर सम्मान' से अलंकृत भी किया गया। समारोह में बतौर मुख्य अतिथि मौजूद उप्र के राज्यपाल राम नाईक ने बाबूराव विष्णु पराड़कर के संदर्भ से कहा कि हिंदी क्षेत्र में मराठी के लोगों ने भी बेहतर काम किया है और यह प्रमाणित करता है कि हिंदी केवल हिंदी भाषियों की नहीं बल्कि सभी भारतीयों की भाषा है। उन्होंने हृदयनारायण को सम्मान के लिए बधाई देते हुए कहा कि कर्नाटक चुनावों पर उनका लेख अद्भुत था और उनकी लेखनी से कभी-कभी ईर्ष्या होती है। उन्होंने नई पीढ़ी के पत्रकारों से सकारात्मक पत्रकारिता करने की अपील की। इससे पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. रीता बहुगुणा जोशी और बृजेश पाठक ने भी समारोह को सम्बोधित किया।

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