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डीजल चोरी की जिसको सौंपी जांच उसे दे दी चार्जशीट

70 हजार लीटर डीजल चोरी मामले की मुख्यालय पर चल रही जांच

2014 से डीजल चोरी की फाइल को दबाए है मुख्यालय के अफसर

चार्जशीट दिए जाने से परेशान अफसर ने जांच से हाथ खींचे

आरोपी अफसर को बना दिया हरदोई डिपो का क्षेत्रीय प्रबंधक

लखनऊ। कार्यालय संवाददाता

परिवहन निगम मुख्यालय पर 70 हजार लीटर डीजल चोरी की जांच मामले में नया मोड़ आ गया है। मुख्यालय के जिस प्रधान प्रबंधक को जांच की जिम्मेदारी दी गई थी मुख्यालय के उच्चाधिकारियों ने उस अधिकारी को ही चार्जशीट थमा दिया। निगम मुख्यालय की इस हरकत से मामले की जांच कर रहे अफसर ने आगे की जांच करने से इंकार कर दिया। मामला एमडी के संज्ञान में आया तो उन्होंने जल्द जांच पूरी कराने का आश्वासन देते हुए दोषी के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कहीं।

अप्रैल 2014 में तत्कालीन प्रबंध निदेशक रहे मुकेश कुमार मेश्राम के सामने डीजल चोरी का मामला सामने आया। उस वक्त बरेली डिपो में तैनात रहे एआरएम मनोज त्रिवेदी पर डीजल चोरी का आरोप लगा। मामले की शिकायत मुख्यालय पर अफसरों से की गई तो परिवहन निगम के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा डीजल चोरी मामला सामने आया। इस मामले की जांच को आगे बढ़ाने के लिए तत्कालीन एमडी ने मुख्य प्रधान प्रबंधक (प्रशासन) को पत्र लिखा। इस पत्र को मुख्य प्रधान प्रबंधक (प्रशासन) ने नौ माह तक दबाए रखा। इसके बाद उन्होंने जनवरी 2015 में जांच मुख्यालय के प्रधान प्रबंधक आलोक सक्सेना को सौंप दिया। 2017 में आलोक सक्सेना का प्रमोशन हो गया और उन्होंने जांच प्रधान प्रबंधक अतुल भारती को सौंप दिया। जांच में देरी होने पर मुख्यालय के अफसरों ने अतुल भारती को ही चार्जशीट सौंप दी।

आरोपी अफसर जांच से दूर भागता रहा

जांच अधिकारी अतुल भारती बताते है कि आरोपी अफसर जांच में सहयोग करने से दूर भागता रहा है। जबकि मुख्यालय से दर्जनों पत्र बयान दर्ज कराने के लिए भेजा गया। बावजूद मुख्यालय आकर भी बयान दर्ज कराने की कोशिश नहीं की। इस वजह से जांच में देरी हो रही थी। आलाधिकारी बिना मामले को समझे चार्टशीट दे दी।

तीन माह में बयान दर्ज नहीं कराया तो निलंबन तय

निगम मुख्यालय के अफसर बताते है कि नियम है कि किसी भी मामले में आरोपी की जिस तारीख से जांच शुरू की गई उस तारीख से तीन माह के अंदर जांच में सहयोग नहीं करता या बयान दर्ज नहीं कराता तो आरोपी पर निलंबन की कार्रवाई तय है। बावजूद निगम मुख्यालय के अफसर मामले को बीते चार वर्ष से लटकाए है। जांच रिपोर्ट एमडी के सामने पेश नहीं कर रहे है। अब मामला एमडी पी गुरू प्रसाद के संज्ञान में आने के बाद मुख्यालय पर हड़कंप मचा है।

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